योगी मंत्रिमंडल से शीर्ष संगठन तक सर्जरी की तैयारी : पहले मंत्रिमंडल विस्तार, फिर संगठन में बदलाव
-मिशन-2027 के लिए भाजपा साधेगी नया सामाजिक समीकरण -प्रदेश अध्यक्ष की रेस वाले चेहरे राष्ट्रीय टीम का बन सकते हिस्सा
धीरेंद्र सिंह/ लखनऊ, अमृत विचार: पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों से उत्साहित भाजपा अब 2027 के सबसे बड़े राजनीतिक रणक्षेत्र उत्तर प्रदेश पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और चल रही राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, यूपी भाजपा संगठन और योगी सरकार दोनों में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक इस बात की चर्चा तेज है कि प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में रहे कई नेताओं को अब राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक संतुलन साधते हुए नए चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले वर्ष दिसंबर में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, जबकि बिहार से आने वाले युवा नेता नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। हालांकि, अब तक दोनों की नई टीम पूरी तरह आकार नहीं ले सकी है। ऐसे में बंगाल और बिहार की राजनीतिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक बदलावों का दौर तेज होने के संकेत हैं।
सूत्रों के मुताबिक, योगी मंत्रिमंडल के कुछ चेहरों को संगठन में लाया जा सकता है। इनमें ऐसे मंत्री भी बताए जा रहे हैं, जिनकी प्रशासनिक रिपोर्ट बहुत मजबूत नहीं मानी गई, लेकिन जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों में उनकी उपयोगिता महत्वपूर्ण है। भाजपा 2027 के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच नया संतुलन बनाने की तैयारी में है।
इसी के साथ यूपी से कई नेताओं को राष्ट्रीय टीम में भेजे जाने की अटकलें भी तेज हैं। चर्चा है कि राष्ट्रीय संगठन में अपेक्षाकृत युवा और आक्रामक राजनीतिक शैली वाले नेताओं को तरजीह मिल सकती है। इस क्रम में पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, राज्यसभा सदस्य एवं प्रदेश महामंत्री अमरपाल मौर्य और एमएलसी अश्विनी त्यागी के नाम चर्चाओं में बताए जा रहे हैं। एक कैबिनेट मंत्री के भी राष्ट्रीय टीम में समायोजित होने की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा के पुराने राष्ट्रीय चेहरों डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, रेखा वर्मा, राधा मोहन अग्रवाल और अरुण सिंह की भूमिका को लेकर भी संगठन के भीतर नई चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि पार्टी आने वाले चुनावों को देखते हुए पीढ़ीगत बदलाव और नए सामाजिक समीकरणों पर दांव लगा सकती है।
पहले मंत्रिमंडल विस्तार, फिर संगठन में बदलाव
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि उत्तर प्रदेश में पहले योगी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। इसके बाद प्रदेश इकाई, मोर्चों और क्षेत्रीय अध्यक्षों में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। भाजपा का फोकस सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि 2027 के लिए कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना भी माना जा रहा है।
दिल्ली की नजर यूपी पर क्यों
भाजपा नेतृत्व मानता है कि 2027 का उत्तर प्रदेश चुनाव केवल राज्य की सत्ता का सवाल नहीं होगा, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करेगा। यही वजह है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर ऐसे चेहरों को आगे लाने की तैयारी है, जो सामाजिक समीकरण, संगठन क्षमता और आक्रामक राजनीतिक संदेश तीनों में फिट बैठते हों।
