जनगणना ड्यूटी को लेकर माध्यमिक शिक्षकों में रोष, शिक्षण कार्य प्रभावित होने और ग्रीष्मावकाश समाप्त होने से बढ़ी नाराजगी
लखनऊ, अमृत विचारः जनगणना में ड्यूटी लगाने पर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। माध्यमिक शिक्षक संगठन के प्रादेशिक मंत्री प्रभात कुमार सिंह का कहना है कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रत्येक कक्षा में न्यूनतम 1200 घंटे शिक्षण अनिवार्य किया गया है।
इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए विद्यालयों का समय 5 घंटे 20 मिनट से बढ़ाकर 6 घंटे प्रतिदिन कर दिया गया है। इसके बावजूद शिक्षकों की ड्यूटी कार्य दिवसों में ही प्रतियोगी परीक्षाओं में लगाई जा रही है। अब जनगणना कार्य में भी शिक्षकों की तैनाती से स्थिति और गंभीर हो गई है।
इससे न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि विद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया भी बाधित हो रही है। गरीब और कमजोर वर्ग के छात्र, जो कम शुल्क में सरकारी विद्यालयों में पढ़ते थे, अब निजी विद्यालयों की ओर रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि 22 मई से 30 जून तक चलने वाले जनगणना चरण में शिक्षकों का पूरा ग्रीष्मावकाश समाप्त हो जाएगा।
इस अवधि में शिक्षक अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्व निभाते हैं, लेकिन उन्हें इस कार्य के बदले कोई प्रतिकर अवकाश भी नहीं मिलेगा। संघ ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों को जनगणना कार्य से मुक्त रखा जाए, अन्यथा इसका असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।
