यूपी : चार श्रेणियों में बंटेंगे मजदूर, ‘कोड ऑन वेज’ से बदलेगी वेतन व्यवस्था, जानें नए सरकारी नियम
प्रदेश में लागू होंगी नई श्रम संहिताएं, कौशल के आधार पर तय होगी न्यूनतम मजदूरी
लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश में श्रमिकों (मजदूरों) की मजदूरी और अधिकारों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र की नई श्रम संहिताओं के तहत लागू होने जा रहे ‘कोड ऑन वेज’ में अब मजदूरों को तीन की बजाय चार श्रेणियों में बांटा जाएगा। नई व्यवस्था में अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल और अत्यधिक कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग न्यूनतम मजदूरी तय करने की कवायद जारी है।
प्रमुख सचिव श्रम डॉ. एमकेएस सुंदरम की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश सामाजिक सुरक्षा संहिता, मजदूरी संहिता और औद्योगिक संबंध संहिता की नियमावलियों पर प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर गुरुवार को चर्चा की गई। शासन ने समितियों को संशोधित प्रारूप मंगलवार तक सौंपने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद नियमावली को कैबिनेट में लाया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत हेल्पर और सफाई कर्मचारी अकुशल श्रेणी में रहेंगे, जबकि सीमित प्रशिक्षण वाले कर्मचारी अर्ध-कुशल माने जाएंगे। इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और ड्राइवर जैसे तकनीकी दक्ष कर्मचारी कुशल श्रेणी में होंगे। इंजीनियर, फोरमैन और विशेषज्ञ मैकेनिक को अत्यधिक कुशल वर्ग में रखा जाएगा।
प्रदेश में फिलहाल तीन श्रेणियों के आधार पर मजदूरी तय होती है। वर्तमान में अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 12,356 से 13,690 रुपये, अर्ध-कुशल की 13,590 से 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों की 15,224 से 16,868 रुपये प्रतिमाह है। प्रस्तावित व्यवस्था में अत्यधिक कुशल श्रमिकों की मजदूरी कुशल श्रमिकों से करीब 10 प्रतिशत अधिक हो सकती है। इस आधार पर गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में यह राशि 18,555 रुपये तक पहुंच सकती है।
नई वेतन संरचना में बेसिक वेज, परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) और अन्य भत्ते शामिल होंगे। कुल भत्ते वेतन के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेंगे। साथ ही कर्मचारियों को डिजिटल या लिखित वेतन पर्ची देना अनिवार्य होगा और अलग-अलग रजिस्टरों की जगह एक मास्टर रजिस्टर रखा जाएगा। श्रम विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रमिकों को उनके कौशल के अनुरूप बेहतर वेतन मिल सकेगा।
सनद रहे कि पिछले दिनों हरियाणा के गुरुग्राम और यूपी के नोएडा में मजदूरों का बड़ा आंदोलन देखने को मिला था। बढ़ती महंगाई के बीच न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने को लेकर मजदूर सड़कों पर उतर आए थे और उस आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था। नोएडा में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं देखने को मिली थीं। बाद में शासन-प्रशासन ने फौरीतौर पर वेतन बढ़ोत्तरी के साथ नए सिरे से न्यूनतम मजदूरी तय करने का भरोसा दिया था।
