Bareilly:कुत्तों के हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी में नई तकनीक बनी उम्मीद

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Published By Monis Khan
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बरेली, अमृत विचार। पालतू कुत्तों में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी को अधिक सुरक्षित और सफल बनाने की दिशा में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। संस्थान के शोध में सामने आया है कि फीमर (जांघ की हड्डी) में प्रॉक्सिमल फिशर की स्थिति में डबल-लूप सरक्लेज वायरिंग तकनीक, पारंपरिक सिंगल-लूप तकनीक की तुलना में अधिक मजबूत और प्रभावी है।

डॉ. केएसके कुमार, डॉ. रोहित कुमार समेत अन्य वैज्ञानिकों के शोध में सामने आया कि यह तकनीक भविष्य में पशु चिकित्सा सर्जरी में जटिलताओं को कम करने में मदद करेगी। अध्ययन के दौरान जर्मन शेफर्ड और लैब्राडोर नस्ल के कुत्तों की कुल 54 फीमर हड्डियों पर परीक्षण किया गया। इन्हें अक्षुण्ण, सिंगल-लूप और डबल-लूप तीन समूहों में विभाजित कर विभिन्न परिस्थितियों में जांचा गया। डबल-लूप तकनीक ने अक्षीय दबाव, मोड़ और मरोड़ जैसी सभी स्थितियों में बेहतर यांत्रिक स्थिरता प्रदान की। 

इसमें अधिक भार सहने की क्षमता, बेहतर ऊर्जा अवशोषण और उच्च विफलता सीमा दर्ज की गई। वहीं सिंगल-लूप तकनीक अपेक्षाकृत कमजोर साबित हुई। इसमें पता चला कि जर्मन शेफर्ड की हड्डियां अधिक मजबूत थी। लैब्राडोर की हड्डियों में अधिक लचीलापन पाया गया। हालांकि दोनों नस्लों में डबल-लूप तकनीक समान रूप से प्रभावी रही। वैज्ञानिकों ने बताया कि सीमेंटेड हिप रिप्लेसमेंट के दौरान यदि फीमर में फिशर (छोटी दरार) हो जाए तो उसे तुरंत स्थिर करना जरूरी होता है। ऐसे में यह नई तकनीक पालतू जानवरों के सुरक्षित इलाज और शीघ्र रिकवरी में अहम भूमिका निभा सकती है।

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