Happy Mother's Day: मां के पांव तले है जन्नत, है धरती की ईश्वर हैपी मदर्स डे मां
शबाहत हुसैन विजेता, लखनऊ, अमृत विचार। मां जो जन्म देती है, मां जो पालन-पोषण करती है, जो खुद गीले में सोती है लेकिन बच्चे को सूखे में सुलाती है, वो पढ़ी-लिखी न भी हो तो भी यह जान जाती है कि बच्चे के पेट में दर्द है यह उसे भूख लगी है, मां जो रात-दिन इस मेहनत में गुजार देती है कि उसका बच्चा जिन्दगी के सफर में किसी खूबसूरत अंजाम तक पहुंच जाए, उसे भी कैलेंडर ने साल में सिर्फ एक दिन दिया है मदर्स डे के नाम पर।
मां खुद भूखी रहकर भी अपने बच्चे का पेट भरती है, खुद पुराने कपड़े पहनकर अपने बच्चों को नये कपड़े पहनाती है, अपने बच्चे को मुकाम दिलाने के लिए वो खुद जीना भी भूल जाती है लेकिन बेटा जब कुछ बन जाता है तो अपना परिवार पालने में लग जाता है। उसे नहीं याद रहता कि मां भूखी हो सकती है। उसे नहीं याद रहता कि मां की भी कुछ जरूरतें हो सकती हैं। उसे नहीं याद रहता कि मां के पास भी इमरजेंसी के लिए कुछ पैसे होने चाहिए। कई बार बेटा भूल जाता है कि मां को दवाइयों की जरूरत होती है। दवाइयों के साथ उसे फल भी मिलने चाहिए। वह यह नहीं जान पाता कि बुढ़ापा खुद एक बीमारी है और इस बीमारी से निबटने के लिए उसे पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। शायर परवीन बारसी ने लिखा था :- उसकी फरमाइशें, बच्चों की जिदें, अपनी शराब, ये तो सब लाया मगर मां की दवा भूल गया।
मां दुनिया की अकेली ऐसी सौगात है जो पागल भी हो जाए तो भी अपनी औलाद को नहीं भूलती है। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जिनमें गरीब मां ने अपना सब-कुछ लुटाकर अपने बच्चों को एक मुकाम तक पहुंचाया लेकिन बच्चा मुकाम पाकर मां को भूल गया। वो देश में कहीं दूर या विदेश में सेट हो गया, यहां मां अभावों में जीते हुए दम तोड़ गई।
औलादों की संवेदनहीनता ने समाज में वृद्धाश्रम की नींव डाली है। जिस मां ने अपनी औलाद पर अपनी जवानी न्योछावर कर दी उसका बुढ़ापा आया तो बेटा अपनी जवानी को संवारने में लग गया।
मदर्स डे के लिए कोई एक दिन निश्चित करना ही सबसे बड़ी गलती है। हर दिन जिसमें सूरज निकलता और डूबता है वो मदर्स डे है। जिस दिन भी जिन्दगी में कोई खुशी आती है वो मदर्स डे है, जिस दिन भी कोई तकलीफ आंखों में आंसू लाती है वो मदर्स डे है। जब नौकरी मिलती है, जब प्रमोशन होता है, जब रिटायर्मेंट होता है या फिर जिस दिन बेरोजगारी होती है वो सभी दिन मदर्स डे होते हैं। बच्चों की खुशियों में बेपनाह खुश होती है मां और बच्चों की तकलीफ में छुप-छुपकर रोती है मां। मां को न कभी भूलना है और न मां को कभी याद करना है। मां हमेशा दिल की धड़कनों के साथ धड़कनी चाहिए। मां को भूल नहीं सकते क्योंकि वो पैदा करती है और मां को कभी याद नहीं कर सकते क्योंकि वो हमेशा सांसों की तरह से साथ है।
मां क्या होती है उनसे पूछिये जिनके पास मां नहीं है। मां जब तक है उसका दिल नहीं दुखाइये, जैसे उसने बचपन में दुलराया था वैसे ही बुढ़ापे में उसे भी दुलार की जरूरत होती है क्योंकि मां के पांव के नीचे ही जन्नत होती है और मां ही धरती का ईश्वर होती है। हैपी मदर्स डे मां।
