महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल बन कर उभरी है मछलीशहर तहसील, युवा महिलाओं के हाथ में सत्ता व प्रशासन की जिम्मेदारियां
जौनपुर। उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले की मछलीशहर तहसील इन दिनों महिला सशक्तिकरण की एक अनूठी मिसाल बनकर उभरी है, जहां सत्ता, प्रशासन और कानून व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां युवा महिलाओं के हाथों में हैं। सांसद, विधायक, उप जिलाधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक जैसे प्रमुख पदों पर महिलाओं की तैनाती ने मछलीशहर को पूर्वांचल में एक नई पहचान दिलाई है।
मछलीशहर संसदीय क्षेत्र का ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व पहले से रहा है, लेकिन वर्तमान समय में यह क्षेत्र महिला नेतृत्व को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज देश की सबसे युवा सांसदों में गिनी जाती हैं। उनकी सक्रिय राजनीतिक शैली और जनसंपर्क ने क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया है। संसद से लेकर क्षेत्रीय समस्याओं तक वह लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सड़क, बिजली और रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव जैसे मुद्दों को उन्होंने प्रमुखता से उठाया है।
प्रिया सरोज की सहज कार्यशैली और जनता से सीधा संवाद भी उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण माना जा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि वह आम लोगों के फोन तक रिसीव करती हैं और समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर रहती हैं। उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता रह चुकीं प्रिया सरोज का कहना है कि वह अपनी मेहनत और काम के बल पर जनता के बीच पहचान बनाना चाहती हैं।
वहीं मछलीशहर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व युवा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर कर रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर हाल ही में योगिता सिंह को मछलीशहर का उप जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह बदलापुर में एसडीएम के रूप में अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में रही हैं। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस उपाधीक्षक प्रतिभा वर्मा संभाल रही हैं।
प्रशिक्षण के बाद उनकी यह दूसरी तैनाती है, लेकिन कम समय में ही उन्होंने अपनी सक्रियता और कार्यशैली से क्षेत्र में प्रभाव छोड़ा है। स्थानीय लोगों के बीच उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सकारात्मक चर्चा है। विशेष बात यह है कि एक ही तहसील क्षेत्र में लोकतंत्र, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था के चारों प्रमुख पदों पर युवा महिलाएं कार्यरत हैं।
इसे बदलते सामाजिक ढांचे और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक माना जा रहा है। राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने भी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक बदलाव बताते हुए कहा कि देश में महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ाने के प्रयास अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। मछलीशहर की यह तस्वीर न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनती जा रही है, जहां बेटियां अब केवल भागीदारी नहीं बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
