Bareilly:कभी बोलती थी ताहिर की तूती...अब हिस्ट्रीशीटर हुआ पूर्व चेयरमैन शहला का शौहर
बरेली, अमृत विचार। समाजवादी सरकार में लखनऊ-दिल्ली तक तगड़ा सियासी रसूख रखने वालीं पूर्व नवाबगंज चेयरमैन शहला ताहिर का शौहर डॉ. ताहिर हुसैन अपराधिक बैकग्राउंड के चलते हिस्ट्रीशीटर घोषित कर दिए गए हैं। लूट, हत्या के प्रयास, रंगदारी, बलवा, धोखाधड़ी, सरकारी कार्य में बाधा और एससी-एसटी एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में 14 मुकदमे दर्ज होने को लेकर ताहिर की बरेली पुलिस ने एचस खोल दी है। कई दशक से नगर पालिका, विधानसभा और लोकसभा की चुनावी राजनीति में सक्रिय शहला-ताहिर फैमिली कभी दिग्गज सपा नेता शिवपाल सिंह यादव तो अभी के कुछ साल में मंत्री संजय निषाद के करीब देखी जाती रही है।
बरेली में नवाबगंज क्षेत्र के दबंग चेहरों में शुमार डॉ. ताहिर अब हिस्ट्रीशीटर के रूप में थाने में हाजिरी लगाते नजर आएंगे और लगातार पुलिस की निगाहों में रहेंगे। ताहिर पर हुई इस कार्रवाई से सियासी हलकों में हलचल तेज है। पेशेवर एवं खतरनाक अपराधी एवं माफिया के खिलाफ एसएसपी अनुराग आर्या की मुहिम का जिले में बड़ा असर देखा जा रहा है। कितने ही गुंडे-बदमाश या तो जिला बदर किए जा चुके हैं या पुलिस हिस्ट्रीशीटर घोषित कर ऐसे दागी चेहरों पर नजर रखने में जुटी है। इसी क्रम में डा. ताहिर जैसे दबंग चेहरे की एचएस खोले जाने की कार्रवाई ने लखनऊ तक सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। पुलिस अब ताहिर पर दर्ज मुकदमों की पुरानी फाइलें भी खंगाल रही है। कई मामलों में जांच की स्थिति और कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की गई है। एसएसपी के ‘ऑपरेशन प्रहार’ में इस साल जनवरी से अभी तक पेशेवर 168 अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोली जा चुकी हैं। सबकी ई-मॉनीटरिंग हो रही है और बीट सिपाही सब पर नजर रख रहे हैं।
सरकार में बैक डोर एंट्री भी दागी ताहिर के काम न आई
तेज तर्रार छवि के शहला-ताहिर राजनैतिक रूप से लंबे समय सपा में सक्रिय रहने के अलावा बहुजन समाज पार्टी, मौलाना तौकीर की इत्तहादे मिल्लत काउंसिल(आईएमसी), शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी(प्रसपा) से भी जुड़ा रहा है। 2022 में शहला ताहिर शिवपाल की पार्टी छोड़कर दलबली के साथ भाजपा सरकार में मंत्री संजय निशाद की निशाद पार्टी में शामिल हो गए थे। हालांकि, बैकडोर से परिवार को सत्ता से जुड़ी पार्टी में एंट्री लेने के बाद भी ताहिर का काम नहीं बना और योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत पुलिस के निशाने पर आकर घोषित रूप से हिस्ट्रीशीटर बन गए हैं। ताहिर ने पत्नी शहला की तरह चुनावी राजनीति में खुद भी स्थापित होने को नवाबगंज पालिका से कई बार चेयरमैन चुनाव लड़ा मगर कामयाब नहीं रहे।
महिला सीट होने पर शहला तीन बार लड़ीं और जीतकर चेयरमैन की कुर्सी हासिल की। चेयरमैन रहते पिछड़ी जाति प्रमाणपत्र फर्जी होने और अनियमितताओं के मामले में उनके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हुई थी। इसे लेकर वह हाईकोर्ट गई थीं और कार्रवाई पर स्टे हासिल किया था। शहला 2017 में तौकीर की पार्टी से नवाबगंज में विधानसभा चुनाव लीं मगर तीसरे स्थान पर रहीं थीं। 2019 में शहला-ताहिर ने बेटी शमन ताहिर को शिवपाल की प्रसपा से बरेली सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाया था। मुकाबले में शमन की जमानत भी नहीं बचा पाई थीं। शहला-शमन के निशाद पार्टी में शामिल होने के बाद से पार्टी राजनीति में पहले ही तरह सक्रिय नजर नहीं आ रहा है। डॉ. ताहिर की हिस्ट्रीशीट खुलने से परिवार की चिंताएं जरूर बढ़ी हैं। पुलिस एक्शन को लेकर अमृत विचार ने डॉ.ताहिर व शहला से फोन पर बात करने का प्रयास किया मगर संपर्क नहीं हो सका।
डॉ. ताहिर का शुरू से ही रहा विवादों से नाता
अपराधिक रिकार्ड की वजह से योगी-2 सरकार में हिस्ट्रीशीटर घोषित हुए डॉ. ताहिर का राजनैतिक विवादों से भी पुराना नाता रहा है। विरोधियों के खिलाफ आक्रामक रवैय्या अपनाने को लेकर कई बार नवाबगंज में बड़ी घामसान होती रही है। ताहिर के पारिवारिक माहौल पर भी विवाद का साया रहा है। एक समय ऐसा आया था, जब बरेली के फाइक एन्क्लेव में रहने वालीं गुलनाज से बीवी नंबर-3 के रूप में शादी करने के बाद ताहिर का शहला ताहिर से विवाद हो गया था। तीसरी शादी से परेशान शहला ने ताहिर पर पति धर्म नहीं निभाने के आरोप लगाते हुए तलाक मांगा था। कानूनी लड़ाई के बाद उनके आपस में सुलह हो गई थी। शहला से पहले भी ताहिर की शादी हुई थी। पहली पत्नी से उनके रिश्ते बाद में टूट गए थे।
शहला-ताहिर से पंगेबाजी में रविंद्र राठौर पर लिखे गए 44 केस
डॉ. ताहिर की सियासी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सपा सरकार में उनके राजनैतिक विरोधी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं नवाबगंज के पूर्व पालिका चेयरमैन रविन्द्र राठौर पर दो-चार नहीं, बल्कि पुलिस ने एक साथ 44 मुकदमे ठोंक डाले थे। जवाहरलाल यादव उस समय नवाबगंज के इंस्पेक्टर थे, जिनकी सरकार में सीधी पैठ मानी जाती थी। इतने ज्यादा केस थोपे जाने से परेशान रविन्द्र राठौर परेशान होकर तब किसी को कुछ बताए बिना अज्ञातवास तक भी चले गए थे। भाजपा उस समय राजनैतिक दबाव में कार्रवाई का आरोप लगाते हुए सड़कों पर भी उतरी थी। समय बदलने के साथ नवाबगंज में कहानी अब उलटी दिखाई दे रही है। पिछले निकाय चुनाव में रविन्द्र राठौर की अनुज बधू प्रेमलता राठौर ने शहला ताहिर को शिकस्त दी थी। और अब शहला के शौहर डॉ. ताहिर लिखा-पढ़ी में हिस्ट्रीशीटर बन गए हैं।
