मुरादाबाद में होगा 7.35 करोड़ से विकास, हर वार्ड को मिलेंगे 15 लाख रुपये

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मुरादाबाद, अमृत विचार। वर्ष 2021 में विकास का पहिया ज्यादा नहीं चल सकेगा। कम बजट का रोना रो रही नगर निगम ने हर वार्ड में मात्र 15 लाख के विकास कार्य करने का फैसला लिया है। पूरे महानगर में 7.35 लाख के ही कार्यों को वह करा सकेगा। हर वार्ड के पार्षदों से इस बारे …

मुरादाबाद, अमृत विचार। वर्ष 2021 में विकास का पहिया ज्यादा नहीं चल सकेगा। कम बजट का रोना रो रही नगर निगम ने हर वार्ड में मात्र 15 लाख के विकास कार्य करने का फैसला लिया है। पूरे महानगर में 7.35 लाख के ही कार्यों को वह करा सकेगा। हर वार्ड के पार्षदों से इस बारे में महापौर चर्चा करेंगे। जो सबसे जरूरी कार्य होंगे, पहले उन्हें ही प्राथमिकता दी जाएगी। कोशिश होगी कि 15 लाख रुपये तक का ही उस कार्य में खर्चा हो।

कोरोनाकाल में करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा कर रही नगर निगम के अधिकारी इस बार बजट कम होने की बात कर रही है। पिछले वित्तीय वर्ष और इस साल हुए कार्यों के भुगतान भी निगम द्वारा नहीं किए जा सके हैं। लेखा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार निगम को 26 करोड़ के कार्य कराए गए थे। शासन से एक किश्त जारी होने के बाद आठ करोड़ रुपये का ही भुगतान हो सका है। 18 करोड़ रुपये अब भी उसे ठेकेदार को देने हैं।

महानगर में विकास कार्यों को कराए जाने पर चर्चा की गई तो अकाउंट प्रभारी टीएन मिश्रा ने बड़े कार्यों को न किए जाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि निगम के पास बजट नहीं है। ऐसे में विकास कार्यों को फिलहाल विराम दिया जाए, सही रहेगा। ठेकेदारों का पहले से ही काफी भुगतान रुका हुआ है। हालांकि विकास कार्य न रुके, इसका आश्वासन देते हुए नगर आयुक्त संजय चौहान ने अगले वर्ष जरूरी कामों को करने की बात कही। उन्होंने बताया कि हर पार्षद को अपने वार्ड के 15 लाख तक के कार्य बताने होंगे। इसका प्रस्ताव तैयार होने के बाद उसे कराया जाएगा।

बजट के अभाव में बिलो टेंडर होने का खतरा
नगर निगम के खजाने खाली होने के कारण जो कार्यों के लिए टेंडर जारी होंगे, उनके बिलो होने का खतरा भी मंडरा रहा है। माना जा रहा है ठेकेदार कार्यों को पाने के लिए कम से कम बजट को शामिल कर टेंडर डालेंगे। अधिक बिलो के टेंडर डाले जाने से विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ सकते हैं। इसपर नगर आयुक्त संजय चौहान का कहना है कि बिलो टेंडर आते हैं तो या तो दोबार लाटरी सिस्टम से टेंडर जारी किए जाएंगे। यदि नहीं तो जो टेंडर खुल गए हैं, उनके कार्यों की गुणवत्ता को जांचने के लिए निर्माण विभाग की टीम निरीक्षण करेगी। फोटो लगाकर उस निरीक्षण व जांच के साक्ष्य देगी।

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