Uttrakhand: पहाड़ से रुकेगा पलायन, चकबंदी प्रोत्साहन नीति मंजूर, धामी कैबिनेट में बड़ा फैसला
देहरादून, अमृत विचार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
मंत्रिमंडल ने राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी जोतों को एकीकृत करने और कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति- 2026' को लागू करने की स्वीकृति दी गई है। यह नीति पर्वतीय जनपदों के काश्तकारों के आर्थिक उत्थान और कृषि विकास के लिए एक व्यापक दूरदर्शी नीति साबित होगी। इस नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार द्वारा कड़े दिशा-निर्देश और लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
नीति के तहत प्रदेश के 11 पर्वतीय जनपदों में प्रतिवर्ष प्रति जनपद पांच गांवों में चकबंदी कार्य पूर्ण किया जाएगा। इस प्रकार आगामी पांच वर्षों में 275 गांवों को स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी से कवर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। पात्रता एवं कड़ी शर्तें चकबंदी के लिए केवल उन्हीं गांवों का चयन किया जाएगा जो किसी भी प्रकार के भू-विवाद से पूर्णतः मुक्त हों। साथ ही संबंधित चकबंदी क्षेत्र का न्यूनतम कुल भूमि क्षेत्रफल 10.00 हेक्टेयर होना आवश्यक है। कम क्षेत्रफल होने की दशा में न्यूनतम 25 खाताधारकों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी।
आपसी सहमति से चकों का निर्माण
नीति में भू-स्वामियों द्वारा आपसी सहमति से चक निर्माण का कार्य होगा। काश्तकारों द्वारा स्वयं चकबंदी योजना तैयार कर संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। नीति के तहत काश्तकारों/कृषकों को विशेष प्रोत्साहन और लाभ की व्यवस्था की गई है। यह लाभ काश्तकारों को स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी योजना के पूर्ण होने के उपरांत ही देय होगा। इच्छुक किसान/खाताधारक अपना आवेदन पत्र बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) अथवा सहायक कलेक्टर (परगनाधिकारी) को प्रस्तुत कर सकते हैं।
त्रिस्तरीय निगरानी तंत्र, समीक्षा
नीति के पारदर्शी संचालन, अनुश्रवण एवं समीक्षा के लिए राज्य स्तर पर उच्चाधिकार समिति, राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति तथा जनपद स्तर पर क्रियान्वयन समिति गठित की गयी है। नीति के व्यावहारिक अनुभवों और सुझावों के आधार पर लागू होने के तीन वर्ष के बाद इसमें आवश्यक संशोधन और सुधार किए जाएंगे। अनुमान है कि इस निर्णय से प्रदेश में कृषि, बागवानी और सह कृषि गतिविधियों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
कैबिनेट के अन्य फैसले
- राजस्व परिषद, समीक्षा अधिकारी व सहायक समीक्षा अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026 के संशोधन को मंजूरी।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के क्रम में न्याय विभाग के अंतर्गत रजिस्ट्रार न्यायालय एवं केस प्रबंधक का पद सृजित होगा।
- मेडिकल कॉलेजों में संविदा संकाय सदस्यों को तीन वर्ष के लिए चयन अब सचिव स्तर से होगा।
- चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का ढाचा पुर्नगठित करते हुए अब 40 होंगे।
- राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर में कार्यरत 277 कार्मिकों को समान कार्य-समान वेतन प्रदान होगा।
- चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागान्तर्गत लैब टैक्नीशियन संवर्ग का ढांचा आईपीएचएस मानकानुसार पुनर्गठित होगा। कुल 345 पद मानकानुसार पुनर्गठित करने की मंजूरी।
- महिला स्पोर्टस कॉलेज, लोहाघाट के सुचारू संचालन को प्रधानाचार्य सहित 16 पद सृजित करने की कैबिनेट से मंजूरी।
- लघु जल विद्युत परियोजना विकास नीति, 2015 के कतिपय प्राविधानों में संशोधन होगा।
- ऊर्जा विभाग के अंतर्गत तीनों निगमों में निदेशक की नियुक्ति से संबंधित नियमावली में संशोधन करते हुए निदेशक मंडल में नियुक्त शब्द से नियुक्त शब्द को हटाने की कैबिनेट की मंजूरी।
- उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता नियम-2026 के प्रख्यापन की मंजूरी। इस नियमावली के माध्यम से राज्य में अल्पसंख्यक मुस्लिम, जैन, ईसाई, बौद्ध, पारसी एवं सिख समुदाय के शैक्षणिक विकास एवं नवीन संस्थानों की मान्यता, नवीनीकरण और मान्यता की समाप्ति इत्यादि प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से प्रबंधित करने का प्रावधान किया गया है।
- पंचायत भवन निर्माण हेतु अब 20 लाख रुपए प्रति पंचायत घर निर्धारित करने का अनुमोदन।
- गृह विभाग के अंतर्गत विधि विज्ञान प्रयोगशाला विभाग में 15 पदों सृजित होंगे।
- उत्तराखंड पर्यटन यात्रा व्यवसाय पंजीकरण नियमावली में संशोधन पर कैबिनेट की मंजूरी। अब एक नियमावली। होमस्टे के तहत अब 8 कमरे होंगे। रिन्यूअल फीस ऑनलाइन भुगतान करने पर ऑटोमैटिक रिन्यूलअल माना जाएगा।
