तन की शोभा बढ़ाएंगे डोम्बेया के पौधे से बने कपड़े

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Published By Anjali Singh
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प्राकृतिक फाइबर और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को भी बड़ी सफलताएं मिल रही हैं। प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए हर देश नए उपाय खोज रहा है तो भारत भी इसमें पीछे नहीं है। प्लास्टिक और सिंथेटिक फाइबर के बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पंतनगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने डोम्बेया (डोम्बेया एक्यूटेंगुला) पौधे के तने से प्राकृतिक फाइबर निकालने की तकनीक विकसित की है, जिसका उन्हें हाल ही में पेटेंट भी हासिल हो गया है।

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पंतनगर विवि स्थित सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के क्लोदिंग एंड टेक्सटाइल विज्ञान विभाग की शोधार्थी तैयबा फातिमा ने प्राध्यापक डॉ. शहनाज जहां के निर्देशन में डोम्बेया पौधे के तने से प्राकृतिक फाइबर निकालने में सफलता पायी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि केवल वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी क्रांतिकारी कदम है। डोम्बेया से प्राप्त फाइबर पूरी तरह प्राकृतिक और बायोडिग्रेडेबल है जिससे पर्यावरण पर इसका प्रभाव बहुत न्यूनतम होता है। शोध में पाया गया कि डोम्बेया से तैयार फाइबर मजबूत, टिकाऊ और लचीला है। इसकी गुणवत्ता अन्य पारंपरिक प्राकृतिक फाइबर जैसे कपास, जूट और पटसन के समान पाई गई है। यही कारण है कि इसे भविष्य में बड़े स्तर पर उपयोग के लिए संभावनाशील माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है यदि इसका व्यावसायिक उत्पादन बढ़ता है, तो प्लास्टिक उत्पादों पर निर्भरता कम हो सकती है। यह पर्यावरण और उद्योगों के लिए नई उम्मीद बन सकती है। उल्लेखनीय है कि, गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर, उत्तराखंड में स्थित भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना 17 नवंबर 1960 को हुई थी। इसे भारत में 'हरित क्रांति का अग्रदूत' और 'कृषि का गुरुकुल' भी कहा जाता है। यह विश्वविद्यालय कृषि, प्रौद्योगिकी और संबद्ध विज्ञानों में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा प्रदान करता है।

क्या है डोम्बेया पौधा

डोम्बेया एक फूल वाला झाड़ीदार पौधा है जो भारत, मॉरीशस, पाकिस्तान और अन्य उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके हल्के गुलाबी और सफेद फूल इसे आकर्षक बनाते हैं। यह पौधा मधुमक्खियों और तितलियों को आकर्षित करता है इसलिए इसे जैव विविधता के लिए भी उपयोगी माना गया है। 

उद्योगों के लिए खुले नए रास्ते

विशेषज्ञों के अनुसार, डोम्बेया फाइबर का उपयोग कई उद्योगों में किया जा सकता है। जैसे वस्त्र एवं परिधान उद्योग, इको-फ्रेंडली पैकेजिंग सामग्री, ऑटोमोबाइल इंटीरियर एवं डैशबोर्ड पार्ट्स, इंसुलेशन उत्पाद, फर्निशिंग और होम डेकोर सामग्री और हल्के निर्माण कार्यों में उपयोगी कंपोजिट सामग्री आदि। यह भविष्य में ग्रीन टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग के लिए महत्वपूर्ण संसाधन भी बन सकता है। इतना ही नहीं, डोम्बेया पौधे की खेती, फाइबर निष्कर्षण और प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की संभावना है। छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए यह प्राकृतिक फाइबर आधारित उत्पादों के निर्माण का नया अवसर बन सकता है।

-प्रस्तुति: मृगांक मौली, पंत नगर, ऊधमसिंह नगर