मुरादाबाद: कोरोना काल में घर लौटे 45 हजार मजदूरों को मनरेगा में मिला काम

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मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना महामारी में लगे लाकडाउन में अपने घर लौटे मजदूरों को मनरेगा में लगातार काम दिया जा रहा है। अब तक मनरेगा के तहत 45 हजार मजदूरों को काम मिल चुका है। कोरोना काल में अपने घर लौटे एक लाख 830 नए मजदूरों को पंजीकरण भी हो चुका है, जिसमें अब तक …

मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना महामारी में लगे लाकडाउन में अपने घर लौटे मजदूरों को मनरेगा में लगातार काम दिया जा रहा है। अब तक मनरेगा के तहत 45 हजार मजदूरों को काम मिल चुका है। कोरोना काल में अपने घर लौटे एक लाख 830 नए मजदूरों को पंजीकरण भी हो चुका है, जिसमें अब तक 33 तरीके के काम में लगने के साथ ही इनको कृषि के अलावा बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण देकर रोजगार दिए जा रहे हैं। कुल मिलाकर मनरेगा मजदूरों के लिए लाकडाउन के बाद भरपूर रोजगार मिल रहा है।

देश में कोरोना महामारी के चलते लगे लाकडाउन दौरान दूसरे प्रदेशों व शहर में काम करने वाले हजारों मजदूर अपने जनपद लौट गए थे। इसके बाद यह सभी मजदूर अपने घरों पर खाली समय बिता रहे हैं, जिसके चलते इनके परिवार में परेशानी आने लगी थी। इसे देखते हुए सरकार ने मनरेगा के तहत घरों पर लौटे मजदूरों रोजगार देने की योजना बनाई। इस योजना के तहत अपने जनपद में लाकडाउन से अब तक लगातार मजदूरों को रोजगार दिया जा रहा है। लाडाउन के बाद अपने जनपद में एक लाख 830 नए मजदूरों का पंजीकरण हुआ था।

अब भी लगभग 45 हजार मजदूर मनरेगा के तहत कार्य कर रहे हैं। मनरेगा में तालाब खुदाई व जीर्णोंद्धार, भूमि समतलीकरण, चकरोड के काम कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही अब अधिक से अधिक मजदूरों को काम देने के लिए कृषि के साथ बागवानी में किसानों के खेत में अमरूद, नीबू व आंवला के लिए मजूदरों को रोजगार दिया जा रहा है।

33 तरह के कार्य कर रहे मजदूर
मजदूरों को रोजगार देने के लिए उनसे सभी तरह के कार्य कराए जा रहे है। मनरेगा के तहत मजदूर तालाब खुदाई व जीणोद्धार के अलावा किसानों के खेत में खेती भी कर रहे है। मजदूरों ने लगभग 33 तरह से कार्य मनरेगा के कराए जा रहे है।

मनरेगा के तहत प्रवासी मजदूरों को लगातार काम दिया जा रहा है। अब भी लगभग 45 हजार मजदूर काम कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग एक लाख 830 मजदूरों का पंजीकरण हो चुका है। मनरेगा के तहत तालाब, नदी जीर्णोंद्धार के साथ इस बार बागवानी और अन्य काम से प्रवासी मजदूरों को लाभान्वित किया जा रहा है, जिससे मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा काम मिले और उनका परिवार ठीक से रह सके। -यशवंत कुमार सिंह, परियोजना निदेशक

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