Dhar Bhojshala Dispute : भोजशाला मामले में HC के फैसले को चुनौती देगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, ASI के पुराने रुख का दिया हवाला

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शनिवार को कहा कि भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का फैसला 1991 के पूजा स्थल कानून की मूल भावना के खिलाफ है और मुस्लिम पक्षकार इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे।

बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने एक बयान में यह भी कहा कि यह फैसला ऐतिहासिक तथ्यों, आधिकारिक रिकॉर्ड, पुरातात्विक साक्ष्य और यहां तक कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व के रुख के विपरीत है। 

उनका यह भी कहना है, "कमाल मौला मस्जिद कमेटी फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगी और बोर्ड इस कानूनी लड़ाई में हर संभव समर्थन देगा।" इलियास ने कहा कि यह फैसला पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की मूल भावना और संवैधानिक आदेश के साथ सीधे टकराव में है। इलियास ने कहा, " भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस स्थल के साझा धार्मिक चरित्र को स्वीकार किया था। 

दशकों तक, एएसआई के आधिकारिक रिकॉर्ड और साइनबोर्ड ने स्थल को "भोजशाला / कमाल मौला मस्जिद" के रूप में वर्णित किया, जो इसकी विवादित और साझा धार्मिक स्थिति की आधिकारिक मान्यता थी। इसके अलावा, 2003 की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत, हिंदुओं को मंगलवार को पूजा करने की अनुमति दी गई, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।" 

उन्होंने कहा, " अफसोस की बात है कि न्यायालय इस मामले में प्रामाणिक ऐतिहासिक और आधिकारिक अभिलेखों को उचित महत्व देने में विफल रहा।"

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शुक्रवार को अपने फैसले में भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर के रूप में निर्धारित की थी। उच्च न्यायालय ने 242 पन्नों के फैसले में एएसआई के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। 

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