पीजीआई के डाक्टरों ने श्वास नली में फंसी मूंगफली को निकाल कर मासूम को दिया नया जीवन

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Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर-स्पेशियलिटी विभाग के चिकित्सकों ने जौनपुर जिले के 15 माह के एक बच्चे की श्वास नली में फंसी पुरानी फॉरेन बॉडी (मूंगफली) को सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। बच्चा करीब 20 दिनों से तेज खांसी, बार-बार बुखार और सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित था। 

संस्थान के चिकित्सकों के अनुसार बच्चे का विभिन्न स्थानों पर सांस संबंधी संक्रमण समझकर दवाइयों से उपचार किया जा रहा था, लेकिन श्वांस नली में फंसी बाहरी वस्तु का समय पर पता नहीं चल पाने से उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो रहा था। बाद में बच्चे को एसजीपीजीआईएमएस रेफर किया गया, जहां विस्तृत जांच और इमेजिंग के बाद बाईं मुख्य ब्रोंकस में फॉरेन बॉडी फंसे होने की पुष्टि हुई। 

चिकित्सकों ने तत्काल आपातकालीन ब्रोंकोस्कोपी की योजना बनाई। पीडियाट्रिक सर्जरी, पल्मोनरी मेडिसिन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम ने सामान्य एनेस्थीसिया के तहत ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया कर बच्चे की बाईं मुख्य श्वांस नली से मूंगफली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। प्रक्रिया के बाद बच्चे की हालत में तेजी से सुधार देखा गया। उसकी लगातार बनी खांसी और सांस लेने में कठिनाई में उल्लेखनीय राहत मिली। 

यह जटिल प्रक्रिया पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर बसंत कुमार, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर अजमल खान तथा एनेस्थीसियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर संजय कुमार के मार्गदर्शन में रेजिडेंट चिकित्सकों और ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की संयुक्त टीम द्वारा संपन्न की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि प्री-स्कूल आयु के बच्चों में श्वांस नली और भोजन नली में बाहरी वस्तुएं फंसने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। 

खेलते या खाते समय मूंगफली, बीज, सिक्के, बटन और खिलौनों के छोटे हिस्से सांस के साथ अंदर चले जाते हैं, जो समय पर पहचान न होने पर निमोनिया, सांस लेने में गंभीर दिक्कत और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकते हैं। चिकित्सकों ने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों को बिना निगरानी के छोटे खाद्य पदार्थ या वस्तुएं न दें। यदि किसी बच्चे में अचानक खांसी, दम घुटने जैसा अनुभव, घरघराहट या लगातार सांस लेने में परेशानी दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।  

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