Bareilly:बगैर एंबुलेंस के ठेली पर मरीज, टैंपो में लाश के बाद अब झुलसे युवक की चीखों से सामने आया सिस्टम का सच
बरेली, अमृत विचार। जरूरतमंद-गरीब इलाज के लिए जिस जिला अस्पताल को आखिरी उम्मीद मानते हैं,वहां के हालात इन दिनों बिल्कुल भी ठीक नजर नहीं आ रहे। एंबुलेंस के अभाव में ठेली पर मरीज और टैंपो में लाश की गूंज अभी कम नहीं हुई थी कि सोमवार को रेलवे यार्ड में इलेक्ट्रिक करंट लगने से झुलसे अजनबी नौजवान की चीखों ने सरकारी हेल्थ सिस्टम को फिर आइना दिखा दिया। जीआरपी की टीम उसे इमरजेंसी में उसकी हालत पर छोड़कर चलती बनी।
रेलवे पुलिस के सिपाही सनी कुमार नाम बता रहे युवक को बर्न वार्ड में भर्ती कराने जिला अस्पताल लाए थे। पहले तो जला हुआ मरीज देर तक टैंपो में ही तड़पता रहा मगर कोई कर्मचारी स्ट्रेचर लेकर नहीं पहुंचा। भारी जलन से बेहाल नौजवान टैंपो से खुद निकलकर बाहर टहलता रहा। फिर इमरजेंसी वार्ड के अंदर जाकर फर्श पर लेट गया। कराहता-चीखता रहा और हैल्थ स्टाफ दूसरे कामों में व्यस्त रहा। इमरजेंसी में ही आधे घंटे से ज्यादा गुजर गए। बाद में जैसे-तैसे उसे भर्ती कर बर्न वार्ड भेजा गया। युवक 80 फीसदी से अधिक झुलसा बताया गया है। हालात नाजुक है। उसका वीडियो वायरल हो रहा है और सिस्टम की संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वहीं,एडीएसआईसी डा. रमेश चन्द्र दीक्षित ने इस बारे में बताया कि मरीज को पुलिस वाले लेकर आए थे। डाक्टर से स्टाफ तक सब मौके गए थे। जलन अधिक होने पर वह ठंडे फर्श पर लेट गया था। मरीज का बर्न वार्ड में उपचार किया जा रहा है।
ठेले पर मरीज....एडी हैल्थ जांच में जुटे,देखे सीसीटीवी
बरेली, अमृत विचार: ठेले पर मरीज को ले जाने के मामले की शुरुआती जांच में वार्ड सहायक और नर्स की लापरवाही सामने आई है। सोमवार को एडी हैल्थ जिला अस्पताल पहुंचकर जांच में जुटे रहे। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड के सीसीटीवी कैमरे से लेकर रजिस्टर-रिकार्ड सब चेक किया। पता लगा है कि महिला मरीज भर्ती हुई थी, लेकिन पति स्टाफ को सूचना दिए बगैर ही उसको ठेली पर रखकर ले गया था।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बरेली जिला अस्पताल मामले की गूंज शासन तक सुनी जा रही है। उप मुख्यमंत्री ब्रिजेश पाठक ने प्रकरण को गंभीरता से लेकर कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। ऐसा आरोप है कि इमरजेंसी में इलाज नहीं मिलने के बुजुर्ग ठेले से पत्नी को ले गया। एडी हेल्थ डॉ. तेजपाल जांच में जुटे हैं। छानबीन में महिला का नाम अरहरि देवी और पता सिंधु नगर मौर्या मंदिर के पास होने की बात सामने आई है। जांच में पता चला है कि वह 9 मई को सुबह करीब 11 बजे इमरजेंसी में आई थी। शाम करीब 4:25 बजे पति उसे ठेले से लेकर चला गया था। जांच में सामने आया कि महिला को पीठ में दर्द था। परिजन एंबुलेंस से लेकर आए थे। भर्ती होने के बाद डॉ. ने उसे देखा था और दवा लिखी थी। करीब 5 घंटे तक वह वार्ड में भर्ती रही थी। शुरुआती जांच में चिकित्सकीय लापरवाही नहीं मानी जा रही। वार्ड सहायक और स्टाफ नर्स पर लापरवाही को लेकर गाज गिरना तय है।
अफसरों ने लगाई सुरक्षा गार्डों की फटकार
एडीएम एफआर संतोष सिंह ने जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए सिक्योरिटी गार्डों को फटकार लगाई। उन्होंने पूछा कि अस्पताल परिसर में ठेला आने की जानकारी किसी को कैसे नहीं हुई? डीएम अविनाश सिंह भी साफ कहा है कि लापरवाही, साजिश या तथ्य छिपाने की कोशिश सामने आती है तो सम्बंधित के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
चेकिंग में महिला हॉस्पिटल में डॉक्टर-स्टाफ गायब मिले
जिला अस्पताल मामले का शोर राजधानी तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक अमला भी हरकत में आ गया है। अफसरों ने सोमवार को जिला महिला चिकित्सालय में सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण किया। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) पूर्णिमा सिंह उप जिलाधिकारी (न्यायिक) मीरगंज निधि डोडवाल, अपर उपजिलाधिकारी (सदर) मल्लिका नैन, जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राना और सहायक निदेशक मत्स्य गायत्री पाण्डेय के निरीक्षण में यहां व्यवस्थाओं में खामियां सामने आईं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक त्रिभुवन प्रसाद ड्यूटी पर नहीं मिले। ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तैनात गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शमी और डॉ. मिनाक्षी भी ड्यूटी पर नहीं थीं।
इसके अलावा नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ के अधिकांश कर्मचारी अनुपस्थित थे। टीम जब अल्ट्रासाउंड कक्ष में निरीक्षण किया तो मरीजों से संबंधित कोई वैध रजिस्टर नहीं मिला। अल्ट्रासाउंड नोडल अधिकारी डॉ. सी.पी. सिंह (रेडियोलॉजिस्ट) संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अधिकारियों ने संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। अल्ट्रासाउंड वार्ड में तैनात वार्ड सहायक नीलम यादव के खिलाफ मरीजों से दुर्व्यवहार की कई शिकायतें भी सामने आईं, जिस पर अधिकारियों ने कार्रवाई के निर्देश दिए। मरीजों ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कराने के लिए तीन माह बाद की तारीख दी जा रही है, जिससे गंभीर मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं हेल्पडेस्क पर शिकायत पंजिका में दर्ज शिकायतों के निस्तारण की स्थिति स्पष्ट नहीं मिली।
आपातकालीन सेवाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए प्रवेश द्वार पर स्ट्रेचर न ही व्हीलचेयर उपलब्ध थी। साथ ही प्रवेश द्वार पर वार्ड सहायक और सुरक्षा गार्ड भी गायब मिले। महिला मरीज तरनीम ने बताया कि उनकी पैथोलॉजी जांच अस्पताल में नहीं की जा रही है और बाहर जांच कराने पर करीब 1700 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। एक अन्य मरीज पूनम शुक्ला ने आरोप लगाया कि अस्पताल में प्रोजेस्ट्रोन इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके चलते उन्हें बाहर से इंजेक्शन लगवाने पड़े। निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन को व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार लाने तथा लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
पर्चा काउंटर पर होती दिखी धक्कामुक्की
बरेली। जिला अस्पताल में रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को बड़ी संख्या में मरीज उपचार कराने के लिए पहुंचे। सुबह से लेकर दोपहर तक मरीजों की कतारें काउंटर के सामने लगी रही। लाइन में लगे मरीजों के बीच काहसुनी के बाद धक्कामुक्की भी हुई। सुरक्षा गार्ड ने किसी तरह से मामले को शांत कराया। दो बजे ओपीडी खत्म होने का समय रहा, लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने पर ढाई बजे तक दवा वितरित की गई। 2 हजार से अधिक मरीजों का पंजीकरण हुआ। बुखार, खांसी, उल्टी-दस्त, पेट दर्द, सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। पैथोलॉजी में जांच कराने के लिए 200 से अधिक मरीज पहुंचे। सीएमओ कार्यालय में सोमवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र शिविर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में दिव्यांग पहुंचे। गर्मी और उमस के बीच सुबह 10:30 बजे से ही लोग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लाइन में लगे रहे। शिविर में 86 दिव्यांगों का पंजीकरण हुआ। अभिलेखों की जांच के बाद उनका चिकित्सकीय परीक्षण किया गया।
