UP Electricity Bill: क्या यूपी में महंगी होने वाली है बिजली? NPCL का सरप्लस घटने से उपभोक्ताओं पर मंडराया अतिरिक्त बोझ का खतरा

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Published By Muskan Dixit
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उपभोक्ता परिषद ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की

लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) के टैरिफ और सरप्लस निर्धारण संबंधी मामले में विद्युत नियामक आयोग की ओर से जारी पुनर्परीक्षण आदेश पर गंभीर आपत्ति जताई है। परिषद का कहना है कि आयोग के इस फैसले से प्रदेश के उपभोक्ताओं पर भविष्य में बिजली दरों का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

बिजली बिल में इजाफा होने की प्लानिंग

परिषद अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि आयोग ने वर्ष-23-24 के लिए पूर्व में अनुमोदित लगभग 1500.63 करोड़ रुपये के सरप्लस को पुनर्गणना के बाद घटाकर 593.81 करोड़ रुपये कर दिया है। उनका आरोप है कि इससे नोएडा क्षेत्र में उपभोक्ताओं को लंबे समय से मिल रही लगभग 10 प्रतिशत बिजली दर छूट समाप्त होने तथा भविष्य में दरों में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है।

परिषद ने आयोग के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि एनपीसीएल की ओर से अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दिए गए मामलों के आधार पर हुए इस पुनर्परीक्षण का असर अन्य बिजली कंपनियों के मामलों पर भी पड़ सकता है।

उपभोक्ता परिषद ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की

परिषद का दावा है कि प्रदेश में लगभग 51 हजार करोड़ रुपये के सरप्लस के कारण पिछले सात वर्षों से बिजली दरों में वृद्धि नहीं हुई है और ऐसे निर्णय इस व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। परिषद ने प्रदेश सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर उपभोक्ता हितों की रक्षा हेतु अपीलीय न्यायाधिकरण में प्रभावी पैरवी करने के साथ आयोग के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उपभोक्ता धन से होने वाली मुकदमेबाजी पर भी सवाल उठाए हैं।

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