Ram Mandir Donation Controversy : राम मंदिर में दान चोरी के आरोपों की जांच करेगी एसआईटी, मंडलायुक्त लखनऊ के नेतृत्व में टीम गठित

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ, अमृत विचारः अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि के मंदिरों से चढ़ावा से चोरी होने के बहु चर्चित प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विषय में सत्यता उजागर करने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।

एसआईटी का गठन उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर किया है। जांच टीम में लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ परिक्षेत्र के ही आईजी किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन को शामिल किया गया है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि सात दिनों के अंदर अंतरिम रिपोर्ट और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाए।

गौरतलब हो कि राम मंदिर में चढ़ावे के करोड़ों रुपये की चोरी के दावे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंदिर ट्रस्ट ने शनिवार शाम को सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यालय में पत्र भेजकर चोरी के दावे की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से कराने का अनुरोध किया है। राम मंदिर में दान पात्रों में दान की गई धनराशि चोरी मामले में भाजपा सरकार की किरकिरी हो रही थी।

पत्र के माध्यम से ट्रस्ट का कहना है कि एक उच्च स्तरीय एसआईटी जांच से न केवल इस पूरे प्रोपेगेंडा के पीछे छिपे चेहरों का पर्दाफाश होगा, बल्कि देश की जनता के सामने यह सच भी आ जाएगा कि राम मंदिर में चढ़ावे की एक-एक पाई पूरी तरह सुरक्षित और पूरी पारदर्शिता के साथ बैंक खातों में जमा की जाती है। ट्रस्ट का मानना है कि यह श्रीराम मंदिर की छवि और करोड़ों भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने की एक गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है।

सफाई में क्या बोले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सफाई देते हुए कहा था कि अभी तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है लेकिन विवाद बढ़ने पर भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने नौ जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग कर दी। बुधवार को राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट सदस्यों के साथ बैठक की। इसमें चढ़ावे की राशि, उसके उपयोग और हिसाब-किताब जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। ट्रस्ट ने ही मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सरकार से अनुरोध किया था, जिसके बाद सीएम योगी के आदेश पर एसआईटी बनाई गई। अब एसआईटी मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड, चढ़ावे के जमा और खर्च का लेखा-जोखा खंगालेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मंदिर से चढ़ावे में गड़बड़ी का आरोप कितना सही है।

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