कैंची धाम का विशेष प्रसाद: व्रत और नियमों के पालन के साथ बनता है मालपुआ

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Published By Deepak Mishra
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हल्द्वानी, अमृत विचारः नैनीताल जिले में विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम स्थित है। हर साल 15 जून को कैंची धाम का स्थापना दिवस बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु इस दिन बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन करते हैं और प्रसाद प्राप्त करते हैं। ऐसे में जितना महत्व हर वर्ष आयोजित होने वाले 15 जून को कैंची धाम स्थापना दिवस का है। उतना ही महत्व यहां मिलने वाले मालपुए के प्रसाद का भी है। 

मालपुआ इसे बनाने के कड़े नियम है, शुद्ध देशी घी से मालपुए बनाने में वही श्रद्धालु भाग ले सकता है, जो व्रत पर हो और धोती, कुर्ता धारण कर उस अवधि में लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा हो। बाबा नीम करौली महाराज की इच्छा प्रसाद के रूप में मालपुए बांटने की थी। प्रसाद बांटने के लिए लाखों की संख्या में कागज की थैलियां मंगाई गई हैं। 

मालपुए के प्रसाद के साथ आलू की सब्जी भी भक्तों को दी जाती है। नीम करौली बाबा के कैंची धाम (नैनीताल) में 15 जून (स्थापना दिवस) के अवसर पर बंटने वाला प्रसिद्ध मालपुए का प्रसाद मथुरा से विशेष कारीगरों, मंदिर के सेवकों और स्थानीय ग्रामीणों की ओर से मिलकर बनाया जाता है। 

आस्था का सैलाब, देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु

स्थापना दिवस से एक दिन पहले ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। अब तक लगभग 25,000 से अधिक श्रद्धालु बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन कर चुके हैं। 15 जून को मुख्य आयोजन के दिन करीब पांच लाख से ज्यादा भक्तों की पहुंचने की संभावना है। देशभर से आने वाले भक्तों के लिए यह आयोजन विशेष महत्व रखता है। बड़ी संख्या में लोग दर्शन से वंचित रह जाने पर अपने परिचितों के माध्यम से प्रसाद प्राप्त करते हैं, जिससे कैंची धाम का प्रसाद देश के कोने-कोने तक पहुंच जाता है।

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