राम मंदिर दान पात्र मामला : न एफआईआर, न आधिकारिक शिकायत... फिर किस आधार पर चल रही पुलिस कार्रवाई?
नौ से अधिक कर्मचारियों से पूछताछ की चर्चा, पुलिस ने साधी चुप्पी. कार्रवाई के आधार और प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान पात्र से कथित गड़बड़ी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अब तक न कोई लिखित शिकायत सार्वजनिक हुई है और न ही किसी थाने में एफआईआर दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि हुई है, तब पुलिस और एसओजी किस कानूनी आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।
जानकारी के अनुसार दान राशि की गणना से जुड़े नौ से अधिक कर्मचारियों को उनके घरों से पूछताछ के लिए उठाया गया है। सूत्रों का दावा है कि कुछ लोगों के पास से लाखों रुपये की नकदी भी बरामद हुई है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने अब तक किसी गिरफ्तारी, बरामदगी या दान राशि में गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पूरे मामले पर पुलिस की चुप्पी से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
गिरफ्तार कर्मी लवकुश के पिता बच्चूलाल तिवारी ने शनिवार को बताया कि उनका पुत्र राम मंदिर में कार्य करने गया था। जहां उसको चंदे की धनराशि की गणना में लगाया गया था। उनका कहना है कि 10 जून को एसओजी टीम उनके घर पहुंची और तलाशी के दौरान नकदी बरामद होने के बाद उनके पुत्र को अपने साथ ले गई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। फिलहाल इस मामले में पुलिस प्रशासन ने अपने होंठ सिल रखे हैं।
5 बड़े सवाल
- क्या इस मामले में अब तक कोई एफआईआर दर्ज हुई है?
- पुलिस और एसओजी किस कानूनी आधार पर कार्रवाई कर रही हैं?
- क्या मंदिर ट्रस्ट ने कोई आधिकारिक शिकायत दी है?
- कथित बरामद नकदी का आधिकारिक रिकॉर्ड क्या है?
- पुलिस और ट्रस्ट इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से कब स्थिति स्पष्ट करेंगे?
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान पात्रों से कथित गबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि गिनती से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने हेराफेरी की है। हालांकि, पूरे प्रकरण में अभी इसकी न तो कोई लिखित शिकायत दर्ज हुई है और न ही कोई आधिकारिक एफआईआर। बताया जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट की ओर से की जा रही आंतरिक ऑडिट के दौरान इसका पता चला। रुपये गणना करने वाले कुछ कर्मचारियों पर संदेह हुआ, जिनकी सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। सूत्र बताते हैं कि तीन-चार कर्मचारियों को शुरुआत में हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ के दौरान कुछ नकदी भी बरामद हुई।
पुलिस नहीं कर रही गबन व गिरफ्तारी की पुष्टि
पुलिस प्रशासन ने किसी गिरफ्तारी या गबन की पुष्टि नहीं की। फिर भी, अंदरखाने पूछताछ और छापेमारी जारी है। बीजेपी के कुछ स्थानीय नेताओं ने भी पीएमओ को पत्र लिखा, जिसके बाद पीएमओ ने ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी। यह मामला राम भक्तों के लिए संवेदनशील है। लाखों श्रद्धालु भावना से चढ़ावा चढ़ाते हैं, लेकिन गिनती प्रक्रिया में कथित मिलीभगत के आरोपों ने विश्वास को झकझोर दिया। पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं कि बिना लिखित शिकायत और एफआईआर के निजी एजेंसी की तरह कर्मचारियों को उठाना, पूछताछ करना और चुप्पी साधे रहना कानूनी प्रक्रिया के विपरीत माना जा रहा है। विपक्ष इसे सियासी मुद्दा बना रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे फर्जी प्रचार बता रहा है। मंदिर निर्माण समिति और ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
भाकपा नेता ने की सीबीआई जांच की मांग
भाकपा नेता सूर्यकांत पांडेय ने जनपद के प्रभारी मंत्री के उस बयान की आलोचना की है जिसमें चढ़ावे की लूट को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का आंतरिक मामला बताते हुए पल्ला झाड़ने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि यह लूट सीधे केंद्र सरकार के लचीलेपन का नतीजा है। कहा कि इस मामले की जांच तुरंत सीबीआई से करवाया जाना आवश्यक है।
पुलिस को दी तहरीर, केस दर्ज करने की मांग
साहबगंज निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम मणि तिवारी ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि समाचार पत्रों के माध्यम से राम मंदिर के दानपात्र में आने वाली रकम में गोलमाल करने की सूचना मिली रही है। कहा कि कुछ कर्मचारियों के पास से नकदी बरामद होने की सूचना मिली है। उन्होंने आरोपी कर्मचारियों व अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है।
