India Fertility Rate: भारत में तेजी से सिकुड़ती जन्म दर, मस्क और सान्याल ने जताई बड़ी चिंता

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Published By Muskan Dixit
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नई दिल्ली: भारत की आबादी को लेकर एक चौंकाने वाला और गंभीर ट्रेंड सामने आया है। देश की कुल प्रजनन दर (TFR) अब 'रिप्लेसमेंट लेवल' (2.1) से घटकर 2.0 पर आ गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश में अब औसतन एक महिला अपने जीवनकाल में दो से भी कम बच्चों को जन्म दे रही है। इस बड़े बदलाव ने देश-दुनिया के दिग्गज उद्योगपतियों और अर्थशास्त्रियों को चिंता में डाल दिया है, जिनमें टेस्ला के सीईओ एलन मस्क, पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल और एडेलवाइस म्यूचुअल फंड की सीईओ राधिका गुप्ता शामिल हैं।

2030 के दशक में ही घटने लगती आबादी: संजीव सान्याल

जाने-माने अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने इस ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि भारतीयों को अब यह कड़वा सच स्वीकार कर लेना चाहिए कि देश में सबसे ज्यादा बच्चों के जन्म का दौर दो दशक पहले (साल 2001 में) ही पीछे छूट चुका है। उन्होंने आगाह किया कि:

"अगर देश में लोगों की औसत उम्र (लाइफ एक्सपेक्टेंसी) नहीं बढ़ी होती, तो 2030 के दशक तक आते-आते भारत की आबादी में गिरावट शुरू हो जाती।"

सान्याल के मुताबिक, भारत के सामने अब बढ़ती आबादी का संकट नहीं है, बल्कि घटती प्रजनन दर और बुजुर्ग होती जनसंख्या असली चुनौती है। साल 2001 में जहाँ देश में करीब 2.9 करोड़ बच्चे सालाना पैदा हो रहे थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा घटकर 2.3 करोड़ रह गया है।

कुछ राज्यों की स्थिति विकसित देशों से भी बदतर

हाल ही में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले दस सालों में भारत का फर्टिलिटी रेट 2.3 से लुढ़ककर 1.9 के स्तर पर आ गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई भारतीय राज्यों की स्थिति अब यूरोप के विकसित देशों जैसी हो चुकी है:

राज्य / केंद्र शासित प्रदेश फर्टिलिटी रेट (TFR) वैश्विक तुलना / स्थिति
दिल्ली 1.2 फिनलैंड से भी कम (चीन के करीब)
केरल, तमिलनाडु, प. बंगाल 1.3 बेहद कम (गंभीर गिरावट)
तेलंगाना 1.5 रिप्लेसमेंट लेवल से काफी नीचे
राजस्थान 2.3 अभी भी रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर
उत्तर प्रदेश 2.6 औसत से अधिक जन्म दर
बिहार 2.9 देश में सबसे अधिक

इस ट्रेंड पर दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने भी मुहर लगाते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत की जन्म दर रिप्लेसमेंट स्तर से नीचे जा चुकी है, और पढ़े-लिखे तबके में तो यह बदलाव कई साल पहले ही आ गया था।

 2055 में शिखर पर होगी आबादी, फिर शुरू होगी गिरावट

विशेषज्ञों का मानना है कि 'डेमोग्राफिक मोमेंटम' (जनसंख्या की गति) और बेहतर होती स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण भारत की आबादी एकदम से नहीं घटेगी। यह साल 2055 तक करीब 1.67 अरब के उच्चतम स्तर (पीक) पर पहुंचेगी, लेकिन उसके बाद इसमें स्थायी रूप से गिरावट का दौर शुरू हो जाएगा। चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का अनुभव दिखाता है कि एक बार फर्टिलिटी रेट गिर जाए, तो उसे वापस बढ़ाना लगभग नामुमकिन होता है।

कैरियर या परिवार? राधिका गुप्ता ने दी 'चाइल्डकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर' की सलाह

एडेलवाइस म्यूचुअल फंड की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ राधिका गुप्ता ने इस मुद्दे को एक नए आर्थिक नजरिए से देखने की वकालत की है। उनका कहना है कि जब देश में बच्चे कम पैदा होंगे, तो भविष्य में कार्यबल (Workforce) में हर एक व्यक्ति की उत्पादकता और योग्यता का महत्व बहुत बढ़ जाएगा। ऐसे में महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी सबसे अहम होगी।

विकसित देशों का उदाहरण देते हुए राधिका गुप्ता ने कहा कि जब महिलाएं शिक्षित होकर काम पर निकलती हैं, तो अक्सर फर्टिलिटी रेट गिरता है। इसका समाधान यह नहीं है कि महिलाएं काम करना बंद कर दें, बल्कि समाधान यह है कि हम कैरियर और परिवार के बीच एक संतुलन बनाएं।

उन्होंने सुझाव दिया कि कॉरपोरेट्स और सरकार को व्यावहारिक सपोर्ट सिस्टम तैयार करना चाहिए। कामकाजी माता-पिता के लिए फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑप्शंस और कम ट्रैवलिंग वाले विकल्प होने चाहिए। आने वाले समय में 'चाइल्डकेयर और डे-केयर' (बच्चों की देखभाल का ढांचा) देश के लिए उतना ही जरूरी आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा, जितना आज सड़कें, पोर्ट्स और बिजली हैं।

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