यूपी में विधानसभा चुनाव के ठीक बाद होंगे पंचायत चुनाव, पिछड़ा वर्ग आयोग गठन के बाद योगी सरकार ने दिए बड़े संकेत
-आयोग की रिपोर्ट, आरक्षण निर्धारण और चुनावी प्रक्रिया में लग सकते हैं नौ महीने से अधिक
लखनऊ, अमृत विचार: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय होने के साथ ही पंचायत चुनाव की संभावित समय-सीमा भी लगभग स्पष्ट हो गई है। माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट, सीटों के आरक्षण निर्धारण और राज्य निर्वाचन आयोग की चुनावी तैयारियों की पूरी प्रक्रिया में नौ महीने से अधिक समय लग सकता है। ऐसे में पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना बढ़ गई है।
प्रदेश सरकार ने पंचायतों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी है। आयोग सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगा। इसके आधार पर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए सामान्य रूप से छह माह का समय दिया जाएगा। इसके बाद आरक्षण सूची तैयार करने, आपत्तियां लेने, अंतिम सूची जारी करने और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम तय करने जैसी प्रक्रियाओं में अतिरिक्त समय लगेगा। पूरी प्रक्रिया में नौ महीने से अधिक समय लगने का अनुमान है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि जब तक पंचायत चुनाव की सभी तैयारियां पूरी होंगी, तब तक प्रदेश में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी होगी। ऐसे में प्रशासनिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं को देखते हुए पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं।
क्यों बढ़ सकती है देरी
• आयोग को रिपोर्ट देने के लिए मिलेंगे छह माह
• आरक्षण निर्धारण और आपत्तियों की प्रक्रिया बाकी
• राज्य निर्वाचन आयोग को करनी होगी चुनाव तैयारी
• पूरी प्रक्रिया में नौ महीने से अधिक समय संभव
आगे क्या होगा
• आयोग करेगा सामाजिक और राजनीतिक अध्ययन
• निकायवार आरक्षण सूची तैयार होगी
• अंतिम आरक्षण सूची जारी होने के बाद चुनाव कार्यक्रम बनेगा
• विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना
समय पर पंचायत चुनाव की मांग को लेकर किया प्रदर्शन
पंचायत चुनाव कराने की मांग को लेकर अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन ने सोमवार को हजरतगंज स्थित जीपीओ गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया। इसमें बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मौके पर जाकर प्रदर्शनकारियों की समस्याएं सुनीं। प्रदर्शनकारियों को मिठाई खिलाकर आश्वासन दिया कि सरकार किसी भी पंचायत प्रतिनिधि के साथ अन्याय नहीं होने देगी। सरकार पंचायत चुनाव समय पर कराने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार कर रही है। समय पर चुनाव कराना और प्रदेश में विकास सरकार की प्राथमिकता है। ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। यदि किसी कारण चुनाव में देरी होती है तो मध्य प्रदेश और राजस्थान की तर्ज पर निर्वाचित ग्राम प्रधानों को ही कार्यवाहक प्रशासक बनाया जाए।
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