मिशन 2027 : भाजपा का विधायकों पर 'परफॉर्मेंस टेस्ट' शुरू, सर्वे में खराब निकले तो कटेगा टिकट

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के क्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) ने 2022 में जीते अपने विधायकों का 'रिपोर्ट कार्ड' तैयार करना शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्टी यह परख रही है कि क्षेत्र में विधायक की जमीनी पकड़ कैसी है और जनता के बीच उनकी सक्रियता कितनी है। जिन विधायकों से जनता नाराज है , उनकी जगह नए और जिताऊ चेहरों की तलाश तेज कर दी गई है। 

पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि , " हाईकमान ने पूरे सर्वे की जिम्मेदारी दो बाहरी एजेंसियों को दी है जिनकी टीमें पिछले कई दिनों से शहरी और ग्रामीण इलाकों में घूमकर लोगों से सीधा संवाद कर रही हैं। विधायकों के काम, व्यवहार और क्षेत्र में मौजूदगी पर जनता की राय ली जा रही है। इसके अलावा संभावित नए दावेदारों की लोकप्रियता और जातीय-सामाजिक प्रभाव का भी आकलन किया जा रहा है। भाजपा यह तय करना चाहती है कि 2027 में किस चेहरे पर दांव लगाने से जीत की गारंटी मिलेगी।" 

सर्वे पूरे प्रदेश में मंडलवार कराया जा रहा है। ज्यादातर मंडलों में भाजपा की स्थिति मजबूत है, लेकिन मुरादाबाद मंडल पार्टी के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। 2017 के चुनाव में भाजपा को यहां 27 में से 14 सीटें मिली थीं, जो 2022 में घटकर सिर्फ 10 रह गईं। इसी नुकसान की भरपाई के लिए पार्टी इस मंडल में खास सतर्कता बरत रही है और हर सीट पर मजबूत उम्मीदवार खोज रही है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक संगठन अपने स्तर पर जिला और क्षेत्रवार संभावित उम्मीदवारों की लिस्ट बना रहा है। 

इसमें स्थानीय सांसदों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राय को भी महत्व दिया जाएगा। बाहरी एजेंसियों की रिपोर्ट और संगठन की सूची का मिलान किया जाएगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने बताया कि जो नाम दोनों जगह कॉमन होंगे और जिन पर सहमति बनेगी, उनका टिकट लगभग पक्का माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार एजेंसियों की रिपोर्ट जल्द ही दिल्ली हाईकमान को सौंप दी जाएगी। 

सूत्रों ने बताया कि इस सर्वे में सिर्फ विधायकों का ही नहीं, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं और नौ साल के कामकाज को लेकर भी जनता का मूड भांपा जा रहा है। पार्टी यह जानना चाहती है कि किस इलाके में सरकार की ब्रांडिंग मजबूत है और कहां एंटी-इनकंबेंसी है। नेतृत्व का मानना है कि अभी से मिली जमीनी फीडबैक से 2027 की रणनीति को धार दी जा सकेगी। साफ संकेत हैं कि जो विधायक काम में फिसड्डी साबित हुए, उनका पत्ता अगले चुनाव में कटना तय है।

 गौरतलब है कि इसी तरह कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी की सीटों पर प्राइवेट एजेंसियों से संभावित चेहरों की लिस्ट बनवानी शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी भी अंदरखाने सर्वे के जरिए उम्मीदवार छांट रही है। मायावती की बसपा कई सीटों पर प्रभारी और संभावित प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी दूसरे दलों के मजबूत नेताओं को तोड़कर अपने पाले में लाने में जुटी है। कुल मिलाकर 2027 का चुनावी दंगल शुरू होने से पहले ही सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। टिकट का गणित, जातीय समीकरण और सर्वे रिपोर्ट ही तय करेंगे कि अगली बार लखनऊ की सत्ता किसके हाथ आएगी।  

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