लखीमपुर खीरी : डेढ़ साल तक दबाए रखा मानदेय के लिए आया 67 लाख रुपये 

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Published By Pradeep Kumar
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एनआरएलएम में नए खुलासों से मचा हड़कंप

लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत बेलरायां क्लस्टर में सामने आए कथित करोड़ों के वित्तीय घोटाले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने डेढ़ साल पहले बीओ, बैंक सखी, चौकीदार, आदि का मानदेय का भुगतान करने के लिए 67 लाख रुपये बेलरायां कलस्टर के सीएलएफ (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) के खाते में भेजे थे, लेकिन पदाधिकारियों ने यहां पर भी अपनी खूब मनमानी की। अपनी चुनिंदा कुछ महिलाओं और कमीशन देने वाली महिलाओं को भुगतान कर दिया, लेकिन सैकड़ों महिलाओं को अभी तक भुगतान नहीं दिया गया है। गड़बड़ी और करोड़ों रुपये के गबन के आरोप लगने के बाद बाद अब पीड़ित महिलाएं सामने आकर एक-एक कर भ्रष्टाचार की परतें खोल रही हैं।

करीब डेढ़ साल पहले ग्राम संगठनों, बुक कीपर, समूह सखी, बैंक सखी, सीनियर सीआरपी, आईपीआरपी पशु सखी आदि पदों पर कार्यरत दीदियों को सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से दिया जाता है। सितंबर 2022 से मानदेय नहीं आया था। बताते हैं कि सितंबर 2025 में सरकार ने मानदेय का भुगतान करने के लिए बेलरायां क्लस्टर फेडरेशन (सीएलएफ) के खाते में 67 लाख रुपये भेजे थे। इस क्लस्टर के तहत करीब 1000 से अधिक महिलाएं मानदेय पर कार्यरत हैं। आरोप है कि यह रकम जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचाने के बजाय पदाधिकारियों ने अपने करीबी और कथित कमीशन देने वाली महिला कर्मी को ही भुगतान किया। कुछ को एक भी रुपये नहीं दिए गए। कुछ को दो-दो माह का मानदेय चार-चार हजार रुपये वीओ के बचत खाते पर भेजा। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि जब उन्होंने अपने भुगतान की मांग की तो उन्हें समूह से बाहर निकालने और कार्रवाई की धमकी देकर चुप करा दिया गया। तीन वर्षों से मानदेय न मिलने के कारण कई महिलाओं को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। इधर, विभिन्न समूहों में फर्जी हस्ताक्षर, मोहर और दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये से अधिक के गबन की जांच शुरू होने के बाद अब कई और महिलाएं सामने आई हैं और खुलकर शिकायत करने लगी हैं। महिलाओं का आरोप है कि योजनाओं के नाम पर पैसा तो आया, लेकिन उसका लाभ वास्तविक पात्रों तक नहीं पहुंचा।

अफसरों की चुप्पी और समीक्षा पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीन वर्षों तक इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता आखिर अधिकारियों की नजर से कैसे ओझल रही। एनआरएलएम के तहत संचालित योजनाओं की नियमित समीक्षा बीडीओ, एडीओ, ग्राम पंचायत अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अफसरों द्वारा किए जाने का दावा किया जाता रहा है। इसके बावजूद करोड़ों रुपये के कथित गबन और मानदेय रोकने जैसे मामले सामने आना विभागीय निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अब क्षेत्र में चर्चा है कि या तो अधिकारी केवल कागजों में समीक्षा करते रहे या फिर पूरे खेल में विभागीय मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले में विकास खंड के जिम्मेदार पद पर बैठे एक अफसर की भूमिका संदिग्ध है।

जसनगर और रमुवापुर में भी किया खेल, सात लाख हड़पे 
बेलरायां क्लस्टर की सीएलएफ पदाधिकारियों ने हेराफेरी और गबन के मामलों की फेहरिस्त बढ़ती जा रही है। महिलाओं के मुताबिक जसगनर इच्छा ग्राम संगठन के खाते से करीब साढ़े पांच लाख रुपये सीएलएफ के निर्देश पर प्रकाश प्रेरणा ग्राम संगठन के खाते में ट्रांसफर कराए गए। आरोप है कि बाद में यह रकम कथित रूप से सीएलएफ की सचिव वीओ सुकेता तिवारी ने निकाल लिया। यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि कई खातों में इसी तरह की वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। रमुवापुर के शक्ति प्रेरणा संगठन से दो लाख रुपये भारत प्रेरणा संगठन हरद्वाही में भेजकर सीएलएफ के पदाधिकारियों ने मिलीभगत कर हड़प लिए। मामला खुलने के बाद ग्राम संगठनों काे आरोपी पदाधिकारियों ने दस जून तक रुपये वापस करने का भरोसा देकर उन्हें समझा बुझा रही हैं। महिलाओं ने आरोप लगाया कि खातों की वास्तविक स्थिति उनसे छिपाई जाती थी और बैठकों में भी पारदर्शिता नहीं बरती जाती थी। कई महिलाओं ने कहा कि उन्हें यह तक नहीं बताया जाता था कि उनके समूह के खाते में कितनी राशि जमा है और उसका उपयोग कहां किया जा रहा है।

खाते में रुपये होने के बाद भी मानदेय समय से न दिया जाना गंभीर विषय है। संज्ञान में आया है, इसकी भी जांच कराई जाएगी, जो भी दोषी होगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होगी। -जितेंद्र कुमार मिश्रा, डीसी एनआरएलएम।

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