प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि को बढ़ावा देने की तैयारी में UP सरकार, कृषि और पशुधन की संयुक्त बैठक में बनी रणनीति
लखनऊ, अमृत विचार। प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और गोसंवर्धन को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सरकार खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाना चाहती है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के हित में उपयोगी तकनीकों को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू कर उनकी व्यवहारिकता का परीक्षण कराया जाए। यह निर्देश कृषि मंत्री ने बुधवार को विधान भवन में कृषि एवं पशुधन विभाग की संयुक्त रणनीति बैठक में दिए। पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की मौजूदगी में बैठक में गोबर खाद, सीबीजी प्लांट और फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (एफओएम) के उत्पादन और उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।
पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि गोशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक कृषि के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र के वैज्ञानिक उपयोग से गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है और किसानों की खेती की लागत कम की जा सकती है।
सीबीजी प्लांट और जैविक खाद पर मंथन
बैठक में विशेषज्ञों और संस्थाओं ने गोबर आधारित ऊर्जा उत्पादन, बायोगैस और सीबीजी प्लांट, लिक्विड ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तथा जैविक खाद उत्पादन के मॉडल प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने बताया कि इन तकनीकों से मिट्टी की गुणवत्ता और कार्बन स्तर में सुधार होगा तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी।
गांवों में स्वच्छ ऊर्जा बढ़ाने की योजना
बैठक में सुझाव दिया गया कि गांव स्तर पर छोटे और मध्यम आकार के बायोगैस एवं सीबीजी प्लांट स्थापित किए जाएं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और खेतों की उर्वरता भी बढ़ेगी। अधिकारियों ने कहा कि इन मॉडलों को व्यवस्थित रूप से लागू करने से किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
