बालवाटिका से बदलेगी बुनियादी शिक्षा की तस्वीर : ‘चहक’, ‘कदम’ और बिग बुक के साथ नौनिहालों को गतिविधि आधारित शिक्षा, योगी सरकार का बड़ा कदम

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

लखनऊ, अमृत विचार। योगी सरकार अब बुनियादी शिक्षा सुधार को प्री-प्राइमरी स्तर तक मजबूत करने में जुट गई है। प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री पहुंचाई जा रही है। इसके तहत ‘चहक-1, 2, 3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, बिग बुक, बालवाटिका पुस्तिका और होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड जैसी सामग्री वितरित की जाएगी।

सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उस विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में अहम मानी जा रही है, जिसमें प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को सीखने की मजबूत नींव माना गया है। अब आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण और देखभाल तक सीमित न रखकर उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और गतिविधि आधारित शिक्षण का केंद्र बनाया जा रहा है। शासन के निर्देशों के अनुसार आयु वर्ग के अनुसार शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

‘चहक’ श्रृंखला बच्चों में भाषा विकास और बोलने-सुनने की क्षमता विकसित करेगी, जबकि ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री रचनात्मकता, जिज्ञासा और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देगी। वहीं बिग बुक और टीचर गाइड के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ईसीसीई एजुकेटर्स को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से जोड़ा जाएगा।

प्रदेश में पहले से संचालित स्मार्ट स्कूल, ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत मिशन जैसे अभियानों के साथ अब प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी जोड़ा जा रहा है। सरकार का फोकस ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा पहुंचाने पर है।

गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर

सरकार 3 से 6 वर्ष की आयु को बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास का सबसे महत्वपूर्ण चरण मानते हुए खेल आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा दे रही है। शिक्षण सामग्री के माध्यम से बच्चों में संवाद कौशल, सीखने की रुचि और रचनात्मक सोच विकसित करने पर जोर रहेगा।

‘किताब वितरण ऐप’ से होगी निगरानी

पूरी वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ‘किताब वितरण ऐप’ के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू की गई है। बीएसए, बीईओ, प्रधानाध्यापक और डायट मेंटरों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिक्षण सामग्री हर बालवाटिका तक समय से पहुंचे।

संबंधित समाचार