1 जून से बदल जाएंगे बिजली के दाम, UPPCL ने दिया उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका, जानें क्या बताई वजह

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचारः उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि जून-2026 के लिए प्रस्तावित 10 प्रतिशत फ्यूल एवं पावर परचेज प्राइस एडजस्टमेंट को बिजली दरों में वृद्धि के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक है। कहा कि प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं के लिए लागू मूल बिजली दरों (टैरिफ) में पिछले लगभग छह वर्ष से कोई वृद्धि नहीं की गई है। जून-2026 के लिए प्रस्तावित 10 प्रतिशत एफपीपीपीए बिजली की दरों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि विद्युत नियामक आयोग के प्रावधानों के अनुसार लागू होने वाला एक अस्थायी एवं परिवर्तनीय अधिभार है, जो हर माह वास्तविक विद्युत क्रय लागत के आधार पर घटता-बढ़ता रहता है।

यूपीपीसीएल ने कहा कि एफपीपीपीए का निर्धारण उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा अधिसूचित एमवाईटी रेगुलेशन-2025 के तहत किया जाता है। यह किसी माह से तीन माह पूर्व की अवधि में विद्युत क्रय की वास्तविक लागत तथा आयोग द्वारा अनुमोदित लागत के बीच अंतर के आधार पर निर्धारित होता है। इसलिए इसकी दर प्रत्येक माह अलग-अलग हो सकती है तथा कई बार यह ऋणात्मक (नेगेटिव) भी हो जाती है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती है। 

उदाहरण के तौर पर फरवरी-2026 में एफपीपीपीए 10 प्रतिशत था, जबकि अगले ही माह मार्च-2026 में यह घटकर ऋणात्मक (-2.42 प्रतिशत) हो गया था। इसी प्रकार अप्रैल-2025 से जून-2026 के दौरान एफपीपीपीए कई बार धनात्मक और ऋणात्मक दोनों स्थितियों में रहा है। इससे स्पष्ट है कि यह कोई स्थायी शुल्क नहीं है और न ही बिजली दरों में वृद्धि का संकेत है। 

यूपीपीसीएल ने कहा कि जून-2026 के लिए प्रस्तावित 10 प्रतिशत एफपीपीपीए का प्रमुख कारण माननीय अपीलीय अधिकरण के आदेशों के अनुपालन में किए गए कुछ विशेष भुगतान हैं। इनमें एनटीपीसी को ऐश ट्रांसपोर्टेशन मद में देय एरियर तथा केंद्रीय पारेषण उपयोगिता को पूर्व वर्षों के लंबित देयों का भुगतान शामिल है, जिसके कारण विद्युत क्रय लागत में अस्थायी वृद्धि हुई है।

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