World no Tobacco Day: सावधान! सिगरेट का कश न लगाने वालों को भी निगल रहा है कैंसर

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Edited By Amrit Vichar
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पैसिव स्मोकिंग (नॉन-स्मोकर्स का धुएं के संपर्क में आना) बेहद जानलेवा है और इसके वैज्ञानिक प्रमाण बेहद डराने वाले हैं। जो लोग खुद सिगरेट-बीड़ी नहीं पीते, लेकिन धूम्रपान करने वालों के साथ रहते हैं, वे भी सीधे तौर पर कैंसर की ओर बढ़ रहे हैं।

पैसिव स्मोकिंग (नॉन-स्मोकर्स का धुएं के संपर्क में आना) बेहद जानलेवा है और इसके वैज्ञानिक प्रमाण बेहद डराने वाले हैं। जो लोग खुद सिगरेट-बीड़ी नहीं पीते, लेकिन धूम्रपान करने वालों के साथ रहते हैं, वे भी सीधे तौर पर कैंसर की ओर बढ़ रहे हैं।

7,000 से अधिक रसायन और 69 कार्सिनोजेन्स
विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय कैंसर शोध संस्थानों के अनुसार, बीड़ी-सिगरेट से निकलने वाले धुएँ में 7,000 से अधिक रसायन होते हैं। इनमें से कम से कम 69 रसायन सीधे तौर पर कैंसर पैदा करने वाले (कार्सिनोजेन्स) पाए गए हैं, जिनमें आर्सेनिक, बेंजीन और फॉर्मलाडेहाइड शामिल हैं।

भारत में हर साल 2 लाख मौतें
भारतीय चिकित्सा अनुसंधानों और स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 2 लाख लोग खुद धूम्रपान न करने के बावजूद सिर्फ दूसरों के धुएं के कारण होने वाली बीमारियों से दम तोड़ देते हैं।

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