Great Nicobar Project : ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर राहुल गांधी ने डॉक्यूमेंट्री रिलीज कर सरकार को घेरा, बोले-''रक्षा रणनीति से इसका कोई संबंध नहीं''
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जैव विविधता, आदिवासी, सैनिकों और पर्यावरण पर जोर देते हुए सरकार पर उठाए कई सवाल
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का दायरा 166.10 वर्ग किलोमीटर है। इसमें इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पावर प्लांट और टाउनशिप शामिल है। वर्ष 2035 तक तीन चरणों में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट की लागत 72,000 करोड़ से लेकर 92,000 करोड़ के आसपास आंकी जा रही है।
अमृत विचार, लखनऊ : विश्व पर्यावरण दिवस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अंडमान और निकोबार द्वीप के दौरे की एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज करके, मोदी सरकार के 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' पर एक बार फिर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार के 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' का रक्षा रणनीति से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि ये इकोलॉजी को बिगाड़ने वाला जरूर है।
राहुल गांधी ने कहा कि, मैं पर्यावरण के अनुकूल संतुलित विकास का पक्षधर हूं। लेकिन यहां का घना जंगल उजाड़ा जाएगा।" 1.5 करोड़ पेड़ काटे जा रहे हैं। मूंगा चट्टानों का नामोनिशान मिटाया जा रहा है। सैनिक और आदिवासी विस्थापित होंगे। इसलिए क्योंकि एक बिजनेसमैन, देश की सबसे महत्वपूर्ण और इकोलॉजिकल भूमि पर होटल और कसीनों बनाना चाहता है।"
16 मिनट की डॉक्यमेंट्री में राहुल गांधी ने अंडमान और निकोबार द्वीप की अहमियत पर जोर देते हुए ये समझाने का प्रयास किया हैकि वह देश की पारिस्थितकी (Ecology) तंत्र के लिए क्यों बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) का खुला उल्लंघन हो रहा है।
कोई रक्षा रणनीति नहीं
राहुल गांधी का तर्क है कि 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट' कोई रक्षा रणनीति नहीं है। आईएनएस बाज (INS Baaz) का विस्तार कीजिए-हम सरकार को समर्थन करेंगे। नौसेना पांच साल से विस्तार की मांग उठा रही है, लेकिन उसे नजरंदाज किया गया। न तो ट्रांशिपमेंट पोर्ट के लिए है, क्योंकि केरल में पहले ही मेनलैंड पर पोर्ट बन रहा है।
पर्यावरण की भारी तबाही
राहुल गांधी के मुताबिक, इस परियोजना में लगभग 1.5 करोड़ पेड़ काटे जाएंगे। कोरल रीफ (मूंगा चट्टानें) नक्शे से मिटा दी जाएंगी। राहुल गांधी ने कहा कि देश का हर युवा इस बात को बखूबी समझता है कि चंद पैसों के मुनाफे के लिए हमारी अनमोल प्रकृति को नष्ट नहीं किया जा सकता है।
क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट
अंडमान और निकोबार द्वीप के लिए केंद्र सरकार ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट बनाया है। लागत 72,000 करोड़ से 92,000 करोड़ के बीच है। इसका उद्देश्य ये है कि हिंद-प्रशांत (Indo Pacific) क्षेत्र में भारत की समुद्री रक्षा रणनीति मजबूत की जा सके।
166.10 वर्ग किलोमीटर है क्षेत्र
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट वर्ष 2025 से 2035 तक, तीन चरणों में पूरा किया जाना है। यह परियोजना 166.10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। इसमें 130.75 वर्ग किलोमीटर वन भूमि यानी वन क्षेत्र है और 35.35 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि। यहां चरणबद्ध तरीके से बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।
1-इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट में 14.2 मिलिन टीईयू की क्षमता वाला एक इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (आईसीटीटी) बनाया जाएगा।
2-ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनेगा। हर घंटे करीब 4000 यात्रियों की क्षमता वाला एयरपोर्ट होगा।
3-ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 450 एमवीए का आधुनिक पावर प्लांट बनेगा। हाइब्रिड बिजली प्लांट, जो प्राकृतिक गैस और सौर ऊर्जा पर आधारित होगा।
4-ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट में आधुनिक टाउनशिप का प्लान है। व्यवस्थित तरीके से यहां नगरीय विकास की संरचना की जाएगी। जिसका दायरा करीब 16,610 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा। इस तरह दक्षिण एशिया में भारत अपनी आर्थिक और सामरिक रणनीति को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

