उम्मीद पोर्टल से सुन्नी वक्फ की 30 हजार से ज्यादा संपत्तियां रद्द, दस्तावेजों में खामियां मिलने पर हुई कार्रवाई
शिया वक्फ की 2060 संपत्तियां निरस्त, अब हाईकोर्ट की शरण ही विकल्प, अदालत के आदेश पर ही खुल सकेगा पोर्टल
लखनऊ, अमृत विचार: वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में संपत्तियां उम्मीद पोर्टल से निरस्त कर दी गई हैं। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद पोर्टल ने सुन्नी वक्फ की 30,322 और शिया वक्फ की 2,060 संपत्तियों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। दस्तावेजों में त्रुटियां और अभिलेखों के मेल न खाने को इसका प्रमुख कारण बताया गया है।
केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों का विवरण उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करने के लिए पहले छह माह का समय दिया था। बाद में वक्फ न्यायाधिकरण से मिली अतिरिक्त मोहलत भी 5 जून को समाप्त हो गई। समय सीमा समाप्त होने तक सुन्नी वक्फ की 1.03 लाख से अधिक संपत्तियां पोर्टल पर अपलोड की गईं, लेकिन इनमें से 30 हजार से ज्यादा आवेदन तकनीकी और दस्तावेजी कमियों के कारण खारिज कर दिए गए।
शिया वक्फ की 7,785 संपत्तियों में से 2,060 संपत्तियां भी पोर्टल से बाहर हो गईं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में जौनपुर, बाराबंकी, बस्ती और अलीगढ़ शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार खसरा-खतौनी, रकबा और भूमि अभिलेखों में विसंगतियां सामने आईं, जिनका मिलान वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड से नहीं हो सका।
मुतवल्लियों के सामने कानूनी लड़ाई की चुनौती
वक्फ वेलफेयर फोरम के चेयरमैन जावेद अहमद के अनुसार अब प्रभावित मुतवल्लियों के पास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। वक्फ न्यायाधिकरण अधिकतम छह माह की अवधि पहले ही दे चुका है। अदालत के आदेश के बिना पोर्टल दोबारा नहीं खोला जा सकेगा।
जमींदारी उन्मूलन और चकबंदी बनी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षों में जमींदारी उन्मूलन और चकबंदी के कारण कई भू-अभिलेखों के नंबर बदल गए, लेकिन वक्फ रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन नहीं हो सके। यही विसंगतियां बड़ी संख्या में संपत्तियों के निरस्त होने का कारण बनीं। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया प्रभावित पक्षों के लिए आसान नहीं मानी जा रही है।
