प्रयागराज : धान की रोपाई पर मंडराया संकट, महंगे डीजल और गिरते भूजल स्तर की दोहरी मार
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले की मेजा तहसील के रामनगर क्षेत्र में इस वर्ष धान की खेती गंभीर जल संकट का सामना कर रही है। नहरों में पानी की आपूर्ति न होने से किसान चिंतित हैं और धान की बेहन (नर्सरी) तैयार करने तथा रोपाई का कार्य प्रभावित हो रहा है। कृषि प्रधान इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए नहर व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। धान की खेती के शुरुआती चरण में पर्याप्त पानी की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक होती है।
किसानों का कहना है कि यदि समय पर बेहन की रोपाई नहीं हो सकी तो पौधों की गुणवत्ता प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। नहरों में पानी न आने के कारण कई किसान निजी पंपिंग सेट और ट्यूबवेल का सहारा लेने को मजबूर हैं। हालांकि डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें और भूजल स्तर में गिरावट के चलते यह विकल्प काफी महंगा साबित हो रहा है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के लिए अतिरिक्त सिंचाई खर्च वहन करना कठिन हो गया है।
मेजा (रामनगर) क्षेत्र में धान की रोपाई क्यों प्रभावित
स्थानीय किसानों का आरोप है कि नहरों की नियमित सफाई नहीं होने तथा जल प्रबंधन में खामियों के कारण पानी नहरों के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। नहर विभाग के अधिकारी रामनरेश ने किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही पानी की आपूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि विभाग स्थिति की निगरानी कर रहा है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सिंचाई विभाग का आश्वासन, जल्द बहाल की जाएगी नहरों में पानी की आपूर्ति
किसानों ने सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि नहरों में तत्काल पानी छोड़ा जाए तथा जल वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाया जाए, ताकि धान की रोपाई समय पर हो सके और किसानों को संभावित आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। क्षेत्र के किसानों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध नहीं हुआ तो न केवल धान की फसल प्रभावित होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
