Bareilly ED Raid Day-2: मोबाइल कारोबारी आशुतोष के घर दूसरे दिन भी प्रवर्तन निदेशालय की मैराथन जांच, ₹100 करोड़ के GST फर्जीवाड़े से जुड़े तार

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Published By Muskan Dixit
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बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बड़े कारोबारियों के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। सौ करोड़ रुपये के कथित वस्तु एवं सेवा कर (GST) घोटाले और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में मोबाइल व एफएमसीजी कारोबारी आशुतोष अग्रवाल के मारवाड़ीगंज स्थित आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पड़ताल लगातार दूसरे दिन भी जारी है। मंगलवार सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद टीम देर रात करीब 12 बजे तक दस्तावेजों को खंगालने के बाद वापस लौटी थी, जिसके बाद बुधवार सुबह 6 बजे अधिकारियों ने दोबारा आवास पर पहुंचकर जांच की कमान संभाल ली।

पंजाब कनेक्शन और बड़े ब्रांड्स की डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर नजर

यह बड़ी कार्रवाई करीब एक महीने पहले पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा की ईडी द्वारा की गई गिरफ्तारी की कड़ियों को जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश तक पहुंची है। सिविल लाइंस स्थित प्रसिद्ध आईक्रेस्ट (iCrest) स्टोर के संचालक आशुतोष अग्रवाल सिर्फ मोबाइल सेक्टर में ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी और कैडबरी जैसी दिग्गज कंपनियों के बड़े स्टॉकिस्ट और कैरिंग एंड फॉरवार्डिंग (C&F) एजेंट भी हैं। उनके आवासीय परिसर में ही कार्यालय और मुख्य गोदाम स्थित हैं, जहां केंद्रीय एजेंसी डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड्स, बैंक खातों और सालाना टर्नओवर के आंकड़ों की बारीकी से समीक्षा कर रही है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग और राउंड-ट्रिपिंग का संदेह

केंद्रीय जांच एजेंसी को अंदेशा है कि फर्जी और कागजी कंपनियों (शेल फर्म्स) का नेटवर्क तैयार कर बड़े पैमाने पर अवैध जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया गया है। ईडी के अधिकारी इस बात की तहकीकात कर रहे हैं कि संदिग्ध वित्तीय प्रवाह (मनी ट्रेल) किन-किन संस्थाओं या व्यक्तिगत खातों तक पहुंचा और क्या इस पैसे को वापस 'राउंड-ट्रिपिंग' के जरिए सिस्टम में खपाया गया। इस दौरान कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को कब्जे में लेकर डेटा रिकवर किया जा रहा है।

शहर के व्यापारिक जगत में खलबली, सहमे पड़ोसी

इस बड़ी रेड की भनक लगते ही स्थानीय सर्राफा, कपड़ा और मोबाइल एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों में हड़कंप मच गया। आशुतोष के करीबियों और कर्मचारियों ने जब संपर्क साधने की कोशिश की, तो परिवार के सभी सदस्यों के फोन बंद मिले। गोदाम पर काम करने वाले पल्लेदार, सेल्समैन और दफ्तर के कर्मचारी सुबह से बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए आसपास के पड़ोसी भी मीडिया या अन्य पूछताछ करने वालों को कारोबारी के घर का पता बताने से बचते नजर आए।

पुलिस और एसओजी के बाद अब ईडी की धमक

मारवाड़ीगंज मोहल्ले के निवासी इस बात से हैरान हैं कि ठीक तीन दिन पहले इसी इलाके में स्थानीय पुलिस और एसओजी की टीम ने बड़ी दबिश दी थी। उस कार्रवाई में हवाला कारोबारी जगदीश चोटिया और उसके सहयोगी जमीर अहमद को 35 लाख रुपये की नकदी के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिसका संबंध दिल्ली, कश्मीर और दुबई के हवाला नेटवर्क से बताया गया था। मंगलवार सुबह जब ईडी की टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंची, तो स्थानीय लोगों को लगा कि यह पुलिस की ही कोई पूरक कार्रवाई है। लेकिन जब टीम जगदीश के घर के सामने स्थित आशुतोष अग्रवाल की कोठी के भीतर दाखिल हुई और सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया, तब जाकर साफ हुआ कि यह देश की सबसे बड़ी वित्तीय जांच एजेंसी का छापा है।

 

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