ईरान-अमेरिका के बीच पहले दौर की बातचीत समाप्त, 'डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल' से थमेगा लेबनान संकट

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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ओबबुर्गेन, स्विट्जरलैंड: ईरान युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में चल रही उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ताएं सोमवार को समाप्त हो गईं। इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान ईरान और अमेरिका ने लेबनान में जारी सैन्य संघर्ष से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए एक साझा ''डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल'' (तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र) स्थापित करने पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

मध्यस्थ देशों ने जारी किया संयुक्त बयान

इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान और कतर की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया है। बयान के अनुसार, नवगठित 'तनाव-नियंत्रण समन्वय तंत्र' में लेबनान की सरकार को भी शामिल किया जाएगा। इस सेल का मुख्य उद्देश्य लेबनान में सैन्य अभियानों की समाप्ति के समझौते का पूरी तरह पालन सुनिश्चित कराना होगा।

हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह नई व्यवस्था ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष को रोकने में कितनी प्रभावी साबित होगी। गौरतलब है कि इजराइल का लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा है और उसका स्पष्ट कहना है कि उत्तरी इजराइल पर हमला करने वाले चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता उसके पास होनी चाहिए।

ईरानी विदेश मंत्री ने की पाकिस्तान-कतर की सराहना

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार तड़के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक संदेश साझा कर पाकिस्तान और कतर की अथक मध्यस्थता की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन कोशिशों से "महत्वपूर्ण प्रगति" हासिल हुई है। पाकिस्तान, क़तर और ईरान तीनों देशों ने इस उच्चस्तरीय वार्ता के पहले दौर के संपन्न होने की पुष्टि कर दी है, हालांकि अमेरिका की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। अराघची ने जोर देकर कहा कि इस वार्ता की पहली वास्तविक परीक्षा यह होगी कि क्या यह समन्वय तंत्र लेबनान में इजराइल और हिजबुल्ला के बीच जारी लड़ाई को रोकने में सफल हो पाता है या नहीं।

ट्रंप की 'धमकी' से बढ़ा तनाव, जेडी वेंस की मौजूदगी में हुई बैठक

स्विट्ज़रलैंड में रविवार को इस 60-दिवसीय कूटनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत काफी तनावपूर्ण माहौल में हुई थी। तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया धमकियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। ट्रंप ने लिखा था, "ईरान को तुरंत अपने प्रॉक्सी बलों को लेबनान में परेशानी पैदा करने से रोकना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो हम ईरान पर फिर से बहुत कठोर हमला करेंगे।" इसके जवाब में ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने भी पलटवार करते हुए ट्रंप को बयानों में सावधानी बरतने की चेतावनी दी थी।

इन कड़वाहटों के बावजूद, पृष्ठभूमि में बातचीत का दौर जारी रहा। ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जैरेड कुश्नर ने ईरान के प्रतिनिधियों मोहम्मद बाकिर गालिबाफ और अब्बास अराघची के साथ लगभग 80 मिनट तक गहन बैठक की।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी विरोधाभास

इस वार्ता के बीच रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण फारस की खाड़ी के 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर भी दोनों देशों के दावों में विरोधाभास दिखा। ईरान ने दावा किया कि उसने सप्ताहांत के दौरान इस महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्ग को फिर से बंद कर दिया है, जबकि अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रही। कतर और पाकिस्तान के अनुसार, कूटनीतिक प्रयासों के तहत स्विट्ज़रलैंड में सप्ताह के बाकी दिनों में भी अन्य दौर की वार्ताएं जारी रहेंगी।

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