रायबरेली में ईवी सब्सिडी योजना पर बाबूशाही का ब्रेक! 100 से अधिक आवेदन महीनों से लंबित, एआरटीओ के आदेश भी नहीं आए काम

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Published By Muskan Dixit
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प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सब्सिडी योजना रायबरेली में सुस्त प्रशासनिक प्रक्रिया की भेंट चढ़ती दिख रही है। 100 से अधिक पात्र लाभार्थियों के आवेदन महीनों से लंबित हैं, जबकि एआरटीओ पहले ही शीघ्र निस्तारण के निर्देश दे चुके हैं।

रायबरेली। उत्तर प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पात्र उपभोक्ताओं को ईवी सब्सिडी (EV Subsidy) का लाभ दे रही है, लेकिन रायबरेली में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि विभागीय स्तर पर धीमी प्रक्रिया और लंबित सत्यापन के कारण 100 से अधिक पात्र लाभार्थियों के आवेदन महीनों से अटके हुए हैं।

एआरटीओ के निर्देशों के बावजूद नहीं हुआ निस्तारण

बताया जा रहा है कि एआरटीओ अरविंद कुमार यादव पहले ही लंबित आवेदनों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश जारी कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने स्पष्ट कहा था कि संबंधित पटल पर तैनात कर्मचारी को सभी लंबित मामलों का बिना विलंब सत्यापन और निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय पर सब्सिडी मिल सके।

इसके बावजूद आवेदनों का सत्यापन लंबित रहने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आवेदकों ने लगाए लापरवाही के आरोप

आवेदकों का कहना है कि उन्होंने पोर्टल पर सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर दिए हैं और संबंधित वाहन एजेंसी की ओर से भी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद परिवहन विभाग स्तर पर आवेदन लंबित पड़े हैं, जिससे उन्हें सरकार की सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जवाबदेही तय करने की उठी मांग

मामले को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि जब अधिकारी के निर्देश जारी हो चुके हैं, तब भी लंबित मामलों का निस्तारण क्यों नहीं हो रहा। लोगों का कहना है कि यदि आदेशों के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ रहीं तो संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

साथ ही मांग की जा रही है कि सभी लंबित ईवी सब्सिडी आवेदनों का तत्काल सत्यापन कर पात्र लाभार्थियों को भुगतान कराया जाए तथा आदेशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

क्या बोले एआरटीओ?

एआरटीओ अरविंद कुमार यादव ने कहा कि लंबित मामलों के निस्तारण के लिए पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं। यदि इसके बावजूद किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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