Lakhimpur Kheri News : धान के खेत में 16 फुट का अजगर, किसानों के उड़े होश; वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है। यहां पलिया वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फुलवरिया गांव में एक खेत से करीब 16 फुट लंबा विशालकाय अजगर बरामद किया गया है। अजगर की सूचना मिलते ही दुधवा टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन (DTCF) की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे सुरक्षित निकाला और दुधवा के घने जंगलों में वापस छोड़ दिया।


धान की रोपाई कर रहे किसानों में मचा हड़कंप

पलिया वन क्षेत्र की वन्यजीव टीम अधिकारी नज्रुन्निसा ने बताया कि सोमवार को फुलवरिया गांव में कुछ किसान अपने खेतों में धान की रोपाई कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उन्हें खेत के बीचों-बीच एक अत्यंत विशाल अजगर रेंगता हुआ दिखाई दिया। खेत में इतने बड़े शिकारी को देख किसानों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत इसकी सूचना दुधवा बाघ अभयारण्य (Dudhwa Tiger Reserve) के अधिकारियों को दी।

सफलतापूर्वक किया गया रेस्क्यू

सूचना मिलते ही अधिकारी नज्रुन्निसा अपनी एक्सपर्ट 'डीटीसीएफ' (DTCF) टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गईं। टीम ने बेहद सावधानी और कुशलता के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। अजगर को बिना कोई नुकसान पहुंचाए खेत से सुरक्षित पकड़ा गया और बाद में उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी दुधवा के जंगलों में ले जाकर सुरक्षित छोड़ दिया गया।

मानसून में क्यों बाहर आ रहे हैं अजगर?

दुधवा बाघ अभयारण्य के क्षेत्र निदेशक (Field Director) डॉक्टर एच. राजमोहन ने इस घटना पर प्रशासनिक व वैज्ञानिक पक्ष रखते हुए बताया कि मानसून के मौसम में वन्यजीवों का रिहायशी इलाकों की तरफ आना एक सामान्य प्रक्रिया है।

उन्होंने इसके दो मुख्य कारण बताए

लगातार हो रही बारिश के कारण जमीन के भीतर बने अजगर और अन्य सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, जिससे बचने के लिए वे बाहर आ जाते हैं। पानी से बचने के साथ-साथ ये जीव भोजन और शिकार की तलाश में जंगलों से सटे हुए आस-पास के खेतों या मानवीय बस्तियों का रुख करते हैं।

क्षेत्र निदेशक ने कहा कि जब भी इस तरह के मामले सामने आते हैं, वन विभाग की टीमें पूरी तरह मुस्तैद रहती हैं। इन जीवों को सुरक्षित पकड़कर वापस उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाता है। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे जीवों को खुद नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

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