चित्रकूट मंडी घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई: 8 करोड़ के गबन मामले में दो पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

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Published By Muskan Dixit
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कर्वी विशिष्ट मंडी निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच में ईओडब्ल्यू का एक्शन। तत्कालीन उपनिदेशक (निर्माण) और सहायक लेखाधिकारी गिरफ्तार, विशेष न्यायालय ने भेजा जेल।

चित्रकूट/बांदा। कर्वी स्थित विशिष्ट मंडी स्थल निर्माण में करीब 8 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मंडी परिषद बांदा के तत्कालीन उपनिदेशक (निर्माण) अशोक कुमार और तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी सतीश कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को विशेष न्यायालय, बांदा में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, दोनों आरोपी लंबे समय से गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहे थे। तकनीकी सर्विलांस और सटीक सूचना के आधार पर गठित टीमों ने अशोक कुमार को लखनऊ के मानकनगर स्थित उनके आवास से तथा वर्तमान में अमेठी में तैनात सतीश कुमार यादव को गोंडा स्थित मंडी परिषद कार्यालय से गिरफ्तार किया।

2014 में शुरू हुआ था मंडी निर्माण कार्य

जांच के अनुसार वर्ष 2014 में कर्वी में विशिष्ट मंडी स्थल के निर्माण का ठेका गाजियाबाद की कार्यदायी संस्था ग्लेयर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया गया था। आरोप है कि मंडी परिषद के अधिकारियों ने कंपनी के साथ मिलीभगत कर निर्माण कार्य का फर्जी मूल्यांकन कराया और नियमों की अनदेखी करते हुए बिना मानक के कार्य अथवा अधूरे निर्माण के बावजूद करीब आठ करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया।

2019 में दर्ज हुई थी एफआईआर

मामले का खुलासा होने के बाद वर्ष 2019 में कोतवाली नगर, चित्रकूट में आईपीसी की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 22 जून 2021 को इसकी जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी थी।

दस्तावेज और ऑडिट में मिले साक्ष्य

ईओडब्ल्यू ने विवेचना के दौरान सरकारी अभिलेखों, वित्तीय लेन-देन के ऑडिट, तकनीकी परीक्षण और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों अधिकारियों की संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य जुटाए। इसके बाद न्यायालय से आवश्यक अनुमति लेकर दोनों को गिरफ्तार किया गया।

अन्य आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

ईओडब्ल्यू अधिकारियों का कहना है कि मामले में कार्यदायी संस्था के संचालकों समेत अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

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