Who is Harjinder Kaur? खेतों में चारा काटने वाली बेटी ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दिलाया रजत पदक

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
On

पंजाब के किसान परिवार से निकली हरजिंदर कौर ने गरीबी, संघर्ष और कठिन मेहनत को अपनी ताकत बनाया। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 69 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के नाम रजत पदक दर्ज कराया।

डिजिटल डेस्कः Who is Harjinder Kaur? यह सवाल आज हर भारतीय के मन में है। वजह है ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उनका शानदार प्रदर्शन। हरजिंदर कौर ने महिलाओं के 69 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 227 किलोग्राम (101 किग्रा स्नैच + 126 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर भारत को रजत पदक दिलाया। उनके गले में चमकता यह मेडल सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, मेहनत और हौसले की जीत है।

खेतों से शुरू हुआ चैंपियन बनने का सफर

14 अक्टूबर 1996 को पंजाब के नाभा के पास स्थित मेहस गांव में जन्मीं हरजिंदर कौर एक साधारण किसान परिवार से हैं। उनके पिता साहिब सिंह परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच बचपन से ही हरजिंदर ने खेतों में पिता का हाथ बंटाया। स्कूल से लौटने के बाद उनका अधिकांश समय खेती और पशुओं के लिए चारा काटने में बीतता था।

गांव में हाथ से चलने वाली 'टोका' मशीन से चारा काटना आसान नहीं था। इस कठिन मेहनत ने उनकी भुजाओं और कंधों को असाधारण ताकत दी, जो आगे चलकर वेटलिफ्टिंग में उनकी सबसे बड़ी पूंजी साबित हुई।

कबड्डी से वेटलिफ्टिंग तक का सफर

हरजिंदर का पहला प्यार वेटलिफ्टिंग नहीं बल्कि कबड्डी था। वह कई किलोमीटर साइकिल चलाकर अभ्यास करने जाती थीं। कॉलेज के दौरान उन्होंने रस्साकशी (टग ऑफ वॉर) में भी हिस्सा लिया। इसी दौरान पंजाब के पूर्व राष्ट्रमंडल चैंपियन और कोच परमजीत शर्मा की नजर उनकी ताकत पर पड़ी।

कोच ने उन्हें वेटलिफ्टिंग अपनाने की सलाह दी। शुरुआत में हरजिंदर इस खेल के लिए तैयार नहीं थीं, लेकिन लगातार प्रेरणा मिलने के बाद उन्होंने 2016 में वेटलिफ्टिंग शुरू की और यही फैसला उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बन गया।

जब जेब में होते थे सिर्फ 700 रुपये

खेल के शुरुआती दिनों में आर्थिक तंगी सबसे बड़ी चुनौती थी। हरजिंदर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता उन्हें 350 रुपये आने-जाने के खर्च और 350 रुपये जेब खर्च के लिए देते थे। वह परिवार की स्थिति समझती थीं और अतिरिक्त पैसे मांगने से भी झिझकती थीं।

परिवार ने कई बार कर्ज लेकर भी उनकी ट्रेनिंग जारी रखी। कोरोना महामारी के दौरान जब प्रशिक्षण केंद्र बंद हो गए, तब कोच परमजीत शर्मा ने उन्हें अपने घर में रहने की व्यवस्था दी ताकि अभ्यास प्रभावित न हो।

चारा काटने की मेहनत बनी सबसे बड़ी ताकत

हरजिंदर कई बार कह चुकी हैं कि खेतों में चारा काटने से उनकी भुजाओं की ताकत बढ़ी। उनका मानना है कि गांव की वही मेहनत अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।

कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार दूसरा पदक

बर्मिंघम 2022 में हरजिंदर ने 71 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतकर पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का नाम रोशन किया था।

चार साल बाद ग्लासगो 2026 में उन्होंने अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाया। स्नैच में 99 और 101 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने दो बार गेम्स रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में 123 और 126 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाते हुए कुल 227 किलोग्राम के साथ रजत पदक अपने नाम किया।

हालांकि कनाडा की चार्लोट सिमोनो ने कुल 240 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता, लेकिन हरजिंदर का यह रजत भारत के लिए बेहद अहम उपलब्धि साबित हुआ।

आज लाखों बेटियों की प्रेरणा

हरजिंदर कौर की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं है। यह उस संघर्ष की मिसाल है जिसमें सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, धैर्य और समर्पण के दम पर विश्व मंच तक पहुंचा जा सकता है। खेतों में चारा काटने वाली यह बेटी आज करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

हरजिंदर कौर की प्रमुख उपलब्धियां
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (ग्लासगो) – 69 किग्रा वर्ग में रजत पदक
  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (बर्मिंघम) – 71 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक
  • कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 – कांस्य पदक
  • कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2021 – रजत पदक
  • एशियाई वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 (स्नैच) – कांस्य पदक
  • कई बार राष्ट्रीय चैंपियन और राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी वेटलिफ्टर

यह भी पढ़ेंः Commonwealth Games: चोट से टूटा तेजस्विन शंकर का सपना, आंखों में आंसू; बाहर होने के बाद भी साथी सर्वेश कुशारे को दिलाई रजत पदक की राह

संबंधित समाचार