‘जब तक आदर्श समाज नहीं बनेगा, सिफारिश की जरूरत पड़ती रहेगी’ रिटायरमेंट पर बोले राजस्थान के IPS किशन सहाय मीणा

Amrit Vichar Network
Edited By Ankit Yadav
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जयपुर, अमृत विचार। विवादों में रहे राजस्थान कैडर के IPS अधिकारी किशन सहाय मीणा 31 जुलाई 2026 को पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। जयपुर पुलिस मुख्यालय में उनकी रिटायरमेंट पार्टी हुई। वहीं सेवानिवृत्ति के दिन किशन सहाय ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट करके आदर्श समाज और पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब तक आदर्श समाज नहीं बनता, तब तक सिफारिश की जरूरत पड़ती रहेगी। उनके इस बयान को पुलिस व्यवस्था और समाज को लेकर उनके लंबे समय से चले आ रहे विचारों की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

‘आदर्श समाज और आदर्श पुलिस व्यवस्था नहीं’

रिटायरमेंट के दिन सामने आए वीडियो में किशन सहाय ने समाज और पुलिस व्यवस्था के बीच संबंधों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब तक आदर्श समाज नहीं बनता, तब तक सिफारिश की जरूरत बनी रहेगी। उनके मुताबिक आदर्श समाज और आदर्श पुलिस व्यवस्था अभी मौजूद नहीं है।

उनका यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि किशन सहाय अपने पूरे कार्यकाल के दौरान पुलिस व्यवस्था, सामाजिक सोच और अंधविश्वास जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर भी वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवतावादी सोच को लेकर अपनी बातें रखते रहे हैं।

 

 

 

2004 बैच के प्रमोटेड IPS

किशन सहाय मीणा मूल रूप से राजस्थान के अलवर-दौसा क्षेत्र से बताए जाते हैं। उन्होंने MNIT जयपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने राजस्थान में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। किशन सहाय मीणा राजस्थान कैडर के 2004 बैच के प्रमोटेड IPS अधिकारी हैं। वे 2013 में IPS बने थे। वे टोंक के एसपी रहने के अलावा GRP, CID, जेल और RAC समेत विभिन्न पदों पर तैनात रहे। वर्ष 2023 से वे पुलिस मुख्यालय में IG (मानवाधिकार) के पद पर कार्यरत थे। 31 जुलाई 2026 को उन्होंने पुलिस सेवा से विदाई ली। सेवानिवृत्ति के समय वे IG (मानवाधिकार) के पद पर थे, हालांकि रिटायरमेंट से पहले वे APO (Awaiting Posting Orders) की स्थिति में थे।

धार्मिक बयानों को लेकर रहे चर्चा में

किशन सहाय अपने धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़े बयानों को लेकर भी कई बार विवादों में रहे हैं। सोशल मीडिया और पॉडकास्ट में उन्होंने भगवान, अल्लाह और वाहेगुरु जैसी धार्मिक अवधारणाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने धर्मग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी अपनी राय रखी।

उनके कुछ बयानों में प्रेमानंद महाराज और धीरेंद्र शास्त्री जैसे धार्मिक व्यक्तित्वों की आलोचना भी सामने आई थी। इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर उनके पक्ष और विरोध में प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।

चुनाव ड्यूटी छोड़ने पर हुआ था निलंबन

किशन सहाय मीणा को 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान भी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। उन्हें गुमला जिले के कुछ क्षेत्रों में पुलिस पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप था कि उन्होंने अनुमति के बिना चुनाव ड्यूटी छोड़कर जयपुर वापसी की।

चुनाव आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए राजस्थान सरकार को उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद वे कुछ समय के लिए निलंबित रहे और बाद में बहाल कर दिए गए।

दुष्कर्म के आरोपों के बाद हुए थे APO

किशन सहाय मीणा के खिलाफ वर्ष 2026 में जयपुर के मालवीय नगर थाने में एक महिला ने FIR दर्ज कराई थी। महिला की ओर से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, मारपीट, मोबाइल छीनने और धमकी देने समेत कई आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के बाद सरकार ने उन्हें APO कर दिया था।

हालांकि, इन आरोपों को किशन सहाय ने खारिज किया है। उन्होंने इसे अपने खिलाफ साजिश बताते हुए कहा था कि उनके वैज्ञानिक और अंधविश्वास विरोधी विचारों के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि दुष्कर्म से जुड़े आरोपों की जांच कानून के तहत चल रही है। आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और किशन सहाय मीणा इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहे

किशन सहाय मीणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रहे हैं। वे मानवतावादी सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अंधविश्वास मुक्त समाज जैसे मुद्दों पर लगातार अपनी राय साझा करते रहे हैं। अब जब वे पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, ऐसे में रिटायरमेंट के दिन दिया गया उनका बयान एक बार फिर चर्चा में है। खास तौर पर ‘आदर्श समाज’ और ‘आदर्श पुलिस व्यवस्था’ को लेकर उनकी टिप्पणी पुलिस तंत्र की कार्यशैली पर एक सवाल के तौर पर देखी जा रही है।

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