former up police constable sunil shukla : पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले बर्खास्त सिपाही सुनील को राहत
कोर्ट ने सरकार को जारी की नोटिस
लखनऊ, अमृत विचार : पुलिस विभाग के बड़े अफसरों पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला की सेवा से बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई हुई है। यह सुनवाई लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण (UP State Public Services Tribunal) में हुई है, प्रारम्भिक सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर अपना उत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
मामले की सुनवाई रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी, सदस्य (न्यायिक) एवं सुखलाल भारती, सदस्य (प्रशासनिक) की पीठ के समक्ष हुई।
इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता डॉ. नूतन ठाकुर एवं अधिवक्ता दीपक कुमार हैं।
याचिका में सुनील कुमार शुक्ला की बर्खास्तगी को तथ्य एवं विधि दोनों दृष्टियों से असंवैधानिक एवं अवैध बताते हुए उसे निरस्त करने, सेवा में पुनर्स्थापना तथा अन्य सभी विधिसम्मत सेवा लाभ प्रदान किए जाने का अनुरोध किया गया है।
याचिका का प्रमुख आधार यह है कि याचिकाकर्ता की सेवाएँ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2) के द्वितीय प्रावधान का सहारा लेकर समाप्त की गईं, जबकि याचिकाकर्ता के अनुसार इस मामले में इस संवैधानिक प्रावधान का प्रयोग विधिसम्मत नहीं था।
इसके परिणामस्वरूप उन्हें नियमित विभागीय जांच तथा अपना पक्ष रखने का संवैधानिक अवसर प्राप्त नहीं हो सका।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सुनील कुमार शुक्ला द्वारा पुलिस विभाग में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के संबंध में सार्वजनिक रूप से आवाज उठाने के बाद उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई और अंततः उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
