केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लिए कई बड़े फैसले, ग्रेटर नोएडा में ‘मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक’ केंद्र बनाने को मंजूरी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विभिन्न औद्योगिक गलियारों के निर्माण की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई समिति की बैठक में इस आशय के लिए उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी गयी। सूचना …
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने विभिन्न औद्योगिक गलियारों के निर्माण की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई समिति की बैठक में इस आशय के लिए उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी गयी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने यहां संवाददाताओं को बताया कि इन परियोजनाओं के निर्माण में 7725 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत आएगी। इन औद्योगिक क्षेत्रों के विकास से करीब तीन लाख रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
उन्होने कहा, “ आंध्रप्रदेश के कृष्णपट्टम में 2139 करोड़ रुपए और कर्नाटक के तुमकुरु में 1701 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से इन औद्योगिक गलियारों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में 3,883.80 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से ग्रेटर नोएडा स्थित मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब (एमएमएलएच) और मल्टी ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) का निर्माण किया जाएगा।”
जावडेकर ने कहा , “बंदरगाहों, हवाईअड्डों से सटे पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स, एक्सप्रेस वे और राष्ट्रीय राजमार्गों जैसे बड़े परिवहन गलियारों के आधार के रूप में निर्मित होने जा रहे औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम का उद्देश्य उद्योगों को गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय, टिकाऊ और उत्कृष्ट अवसंरचना उपलब्ध कराकर देश में विनिर्माण निवेश को सुगम बनाना है।”
उन्होंने कहा कि निवेश को आकर्षित करने और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में स्थापित करने के लिए इन शहरों में विकसित भूखंड तत्काल आवंटन के लिए तैयार हो जाएंगे। औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम से विकास को गति देकर और देश भर में निवेश के लिए प्रमुख स्थल तैयार करके ‘आत्मनिर्भर’भारत का लक्ष्य हासिल होगा।
जावडेकर ने कहा , “मल्टी मॉडल संपर्क अवसंरचना के आधार के रूप में इन परियोजनाओं की कल्पना की गई है। ये औद्योगिक शहर विश्वसनीय बिजली और गुणवत्तापूर्ण युक्त विकास के साथ बंदरगाहों, माल ढुलाई के लिए विश्व स्तरीय संरचना, सड़क और रेल संपर्क के साथ पूरी तरह आत्मनिर्भर होंगे।”
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के ज़रिए औद्योगीकरण के माध्यम से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कृष्णापट्टनम नोड के लिए, पहले चरण का विकास पूरा होने पर 98,000 लोगों के लिए रोजगार पैदा होने का अनुमान है, जिसमें से 58,000 लोगों को उसी स्थल पर रोजगार मिलने की संभावना है। तुमकुर नोड के लिए, लगभग 88,500 लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है, जिसमें से 17,700 लोगों को विकास के शुरुआती चरण में खुदरा, कार्यालय और अन्य वाणिज्यिक अवसरों में रोजगार मिलेगा।”
पारादीप बंदरगाह में आंतरिक निर्माण कार्य को कैबिनेट की मंजूरी
सरकार ने देश की प्रमुख पारादीप बंदरगाह में जहाजों के आवागमन के लिए आंतरिक संचालन को मजबूत बनाने के वास्ते सार्वजनिक निजी भागीदारी पीपीपी मोड पर निर्माण कार्य को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
इसके तहत पारादीप बंदरगाह में केप आकार के जहाजों के आवागमन को आसान बनाने के लिए पीपीपी मोड के आधार पर पश्चिमी गोदी के विकास के साथ ही आंतरिक बंदरगाह से जुड़ी सभी आवश्यक सुविधाओं को मजबूत बनाया जाएगा। इस परियोजना पर करीब तीन हज़ार करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। परियोजना के लिए सामान्य सहायक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने में पारादीप पोर्ट का निवेश 612.50 करोड़ रुपये का होगा।
सरकार ने ग्रेटर नोएडा में ‘मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक’ केंद्र बनाने को मंजूरी दी
सरकार ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में ‘मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक’ और परिवहन केंद्र (एमएमटीएच) के गठन को मंजूरी दे दी। देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में मजबूत बनाने के इरादे से यह कदम उठाया गया है। सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आंध्र प्रदेश के कृष्णपत्तनम और कर्नाटक के तुमकरू में औद्योगिक गलियारा नेटवर्क स्थापित करने को भी मंजूरी दे दी।
उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों पर 7,725 करोड़ रुपये की लागत अनुमानित है जबकि 2.8 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। जावड़ेकर ने कहा कि निवेश आकर्षित करने के लिये शहरों में विकसित भूखंड के तत्काल आवंटन की प्रणाली के साथ इन परियोजनाओं से भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखला व्यवस्था में एक मजबूत देश बनेगा।
मंत्रिमंडल ने भारत और भूटान के बीच बाह्य अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग पर एमओयू को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और भूटान के बीच बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग पर हुए सहमति पत्र (एमओयू) को बुधवार को स्वीकृति प्रदान कर दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दोनों देशों के बीच 19 नवंबर, 2020 को बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग पर हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) और उनके आदान-प्रदान को मंजूरी दी गई। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक के बाद संवाददाताओं को यह जानकारी दी।
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस एमओयू से पृथ्वी के दूरस्थ संवेदन, उपग्रह संचार और उपग्रह आधारित नौवहन, अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रहों की खोज, अंतरिक्ष यान और अंतरिक्ष प्रणालियों तथा भू प्रणाली के उपयोग, और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे संभावित हित वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना संभव होगा।
इस सहमति पत्र में डीओएस/ इसरो और भूटान के सूचना और संचार मंत्रालय (एमओआईसी) के सदस्यों के एक संयुक्त कार्यकारी समूह का गठन किया जाएगा, जो कार्यान्वयन की समयसीमा और साधनों सहित कार्ययोजना पर काम करेगा। इसमें कहा गया है कि एमओयू के कार्यान्वयन की समयसीमा और साधनों सहित कार्ययोजना पर काम करने के लिए सहयोग के विशेष क्षेत्रों पर कार्यान्वयन की व्यवस्था की जाएगी तथा एक संयुक्त कार्यकारी समूह की स्थापना की जाएगी।
इसके माध्यम से भूटान सरकार के साथ सहयोग से मानवता के हित के लिए अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग के क्षेत्र में संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। बयान में कहा गया है कि भारत और भूटान औपचारिक अंतरिक्ष सहयोग कायम करने को विदेश मंत्रालय ने नवंबर, 2017 में अंतरिक्ष सहयोग के लिए अंतर सरकार एमओयू के प्रस्ताव को भूटान के सामने रखा था।
फरवरी, 2020 में द्विपक्षीय बैठक के दौरान अन्य सहयोग प्रस्तावों के साथ ही इस मसौदे पर भी विचार विमर्श किया गया था। राजनयिक स्तर पर कुछ वार्ताओं के बाद दोनों पक्षों में एमओयू के व्यवहार्य मसौदे पर सहमति कायम हुई और उसे आंतरिक स्वीकृतियों के लिए आगे बढ़ाया गया। आवश्यक स्वीकृतियां हासिल करने के बाद दोनों पक्षों ने 19 नवंबर, 2020 को एमओयू पर हस्ताक्षर किया।
मंत्रिमंडल ने एस्टोनिया, पैराग्वे, डोमिनिकन रिपब्लिक में भारतीय मिशन स्थापित करने को मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एस्टोनिया, पैराग्वे, डोमिनिकन रिपब्लिक में भारतीय मिशन स्थापित करने को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को बताया कि एस्टोनिया, पैराग्वे, डोमिनिकन रिपब्लिक में भारतीय मिशन स्थापित करने का निर्णय किया गया।
इससे इन देशों के साथ व्यापार, सांस्कृतिक संबंध और परस्पर आदान प्रदान को मजबूती दी जा सकेगी। सरकारी बयान के अनुसार, इन तीन देशों में भारतीय मिशन खोलने से भारत का राजनयिक दायरा बढ़ाने, राजनीतिक संबंधों को गहरा करने, द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और आर्थिक जुड़ाव में विकास को सक्षम करने, लोगों से लोगों के मजबूत संपर्कों को कायम करने, बहुपक्षीय मंचों में राजनीतिक पहुंच को बढ़ावा देने और भारत के विदेश नीति उद्देश्यों के लिए समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी।
इन देशों में भारतीय मिशन वहां के भारतीय समुदाय और उनके हितों की रक्षा करने में बेहतर तरीके से सहायता कर पाएंगे। बयान में कहा गया है कि इससे भारत की राजनयिक उपस्थिति में बढ़ोतरी होने से पारस्परिक रूप से भारतीय कंपनियों को बाजार तक पहुंच मुहैया होगा और वस्तुओं एवं सेवाओं के भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा । इसका ‘आत्मनिर्भर भारत’ के हमारे लक्ष्य के अनुरूप घरेलू उत्पादन और रोजगार को बढ़ाने में सीधा असर होगा।
