केजीएमयू की कमान फिर डॉ. सोनिया नित्यानंद के हाथ, राज्यपाल ने तीन साल के लिए दोबारा बनाया कुलपति

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Edited By Virendra Pandey
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1905 में स्थापना के बाद पहली बार किसी डॉक्टर को मिला दूसरा कार्यकाल

लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की कमान एक बार फिर पद्मश्री डॉ. सोनिया नित्यानंद को सौंप दी गई है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें तीन वर्ष के लिए दोबारा विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। इसके साथ ही डॉ. सोनिया नित्यानंद ने केजीएमयू के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। वर्ष 1905 में स्थापित मेडिकल कॉलेज और बाद में बने विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहली बार है, जब किसी डॉक्टर को दूसरी बार कुलपति की जिम्मेदारी मिली है।

अगस्त 2023 से 2026 तक के अपने पहले कार्यकाल में डॉ. सोनिया नित्यानंद के नेतृत्व में केजीएमयू ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की। विश्वविद्यालय को नैक से ए प्लस-प्लस मान्यता मिली और एनआईआरएफ रैंकिंग में वह देश के शीर्ष पांच चिकित्सा संस्थानों में शामिल हुआ। विभिन्न विभागों में रोबोटिक सर्जरी का विस्तार भी उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में रहा।

चार हजार बेड, रोज सात-आठ हजार मरीज... चुनौतियां भी बड़ी
प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार केजीएमयू में करीब 4000 बेड हैं। इनमें अधिकांश हमेशा भरे रहते हैं। रोजाना सात से आठ हजार मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं और देशभर से मरीज इलाज के लिए यहां आते हैं। ऐसे में दूसरे कार्यकाल में डॉ. सोनिया नित्यानंद के सामने चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और विस्तार के साथ मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती होगी।

रोबोटिक सर्जरी से ट्रांसप्लांट तक बढ़ी रफ्तार
डॉ. सोनिया नित्यानंद के पहले कार्यकाल में केजीएमयू में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ। सीएसआर के सहयोग से संचालित कार्यक्रम के तहत करीब 190 सब्सिडी वाली रोबोटिक सर्जरी की गईं। लिवर, किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाओं को भी गति मिली। ट्रॉमा सेंटर को अपग्रेड करने के साथ ही 500 बेड वाले ट्रॉमा-2 के निर्माण की शुरुआत कराई गई।

विश्वविद्यालय के इतिहास पर नजर डालें तो अब तक 36 प्रिंसिपल यहां अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जबकि विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद 12 कुलपति नियुक्त हुए हैं। ऐसे में डॉ. सोनिया नित्यानंद की पुनर्नियुक्ति संस्थान के प्रशासनिक इतिहास में महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

पिता-पुत्री की पद्मश्री जोड़ी
डॉ. सोनिया नित्यानंद ने केजीएमयू से वर्ष 1986 में एमबीबीएस और 1989 में एमडी (मेडिसिन) की डिग्री हासिल की। वह देश की प्रतिष्ठित इम्यूनोलॉजिस्ट, हीमैटोलॉजिस्ट और चिकित्सा शिक्षिका हैं। वर्ष 2025 में चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया। डॉ. सोनिया नित्यानंद और उनके पिता उन दुर्लभ पिता-पुत्री जोड़ियों में शामिल हैं, जिन दोनों को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है।

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