Kanpur News : जाजमऊ में 11-12 अगस्त को मनाया जाएगा हजरत मख्दूम शाह आला का 768वां उर्स, लाखों जायरीन होंगे शामिल

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मौलाना हाशिम अशरफी ने कहा- 60 वर्षों तक हजरत मख्दूम शाह आला ने दिया इंसानियत और मोहब्बत का पैगाम

कानपुर के जाजमऊ स्थित हजरत मख्दूम शाह आला की दरगाह शरीफ पर 11 और 12 अगस्त को 768वां उर्स मुबारक मनाया जाएगा। उर्स की तैयारियों को लेकर मदरसा अलजामिअतुल इस्लामिया अशरफुल मदारिस, गद्दियाना में जलसा आयोजित किया गया। इस दौरान बताया गया कि 10 अगस्त को मजार शरीफ को गुस्ल दिया जाएगा, जबकि 12 अगस्त को कुलशरीफ में बड़ी संख्या में जायरीन शामिल होंगे।

कानपुर, अमृत विचार। हजरत शैख अलाउद्दीन वल्दीन मोहम्मद यूसुफ शैखजादा फारूकी, अलमारूफ हजरत मख्दूम शाह आला ईरान के शहर जंजान से कानपुर के जाजमऊ इलाके में अमन का पैगाम लेकर पहुंचे और 60 वर्षों तक मोहब्बत का पैगाम दिया। हजरत मख्दूम शाह आला ईरान के शहर जंजान से शिक्षा हासिल करने के लिए बगदाद गये और दो साल तालीम लिया। इसी दौरान उनकी मुलाकात हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती हसन संजरी अजमेरी से हुई। ये बात गरीब नवाज के हिंदुस्तान आने से पहले का है।

रविवार को मदरसा अलजामिअतुल इस्लामिया अशरफुल मदारिस गद्दियाना में हजरत मख्दूम शाह के उर्स आगमन को लेकर जलसा आयोजित किया गया जिसमें हजरत मख्दूम शाह आला दरगाह के संरक्षक इरशाद आलम, सज्जादानशीन अदनान राफे, अलहाज सैयद खुर्शीद आलम ने प्रमुख रुप से शिरकत की। हजरत मख्दूम शाह आला का 768 वां उर्स मुबारक 11 मंगलवार एवं 12 अगस्त 2026 बुधवार को जाजमऊ स्थित उनकी दरगाह शरीफ पर मनाया जाएगा।

बुधवार को सुबह 11 बजे कुलशरीफ में लाखों लोग शिरकत करेंगे। इसके पहले सोमवार 10 अगस्त को मजार शरीफ को गुस्ल दिया जाएगा। मौलाना हाशिम अशरफी ने कहा कि हजरत मख्दूम शाह आला ने जाजमऊ में 60 वर्षों तक इंसाफ, इंसानियत और मोहबब्त का पैगाम दिया।

ऑल इंडिया गरीब नवाज काउंसिल के अध्यक्ष एवं गद्दियाना ईदगाह के पेशइमाम मौलाना हाशिम अशरफी ने अपने खिताब में कहा कि हजरत मख्दूम शाह आला 599 हिजरी में जब दिल्ली पहुंचे तो उस वक्त हिंदुस्तान में सुल्तान मोहम्मद गौरी का दौर था और कुतुबुद्दीन ऐबक बादशाह थे। उधर अजमेर शरीफ को ख्वाजा गरीब नवाज दीन का मरकज (मुख्यालय) बनाकर पूरे मुल्क मे मोहब्बत का पैगाम दे रहे थे। 

मौलाना ने बताया कि हजरत मख्दूम शाह आला ने 60 वर्ष जाजमऊ में गुजारे और अल्लाह के बंदों को आपस में प्यार व मोहब्बत का पाठ पढ़ाया और 125 वर्ष की उम्र में 22 फरवरी 1259 में हजरत मख्दूम शाह आला ने इस दुनिया से रुख्सत हुए। हाफिज मिनहाजुद्दीन कादरी ने कुरआन की तिलावत की। मोहम्मद हसन शैली अशरफी, कारी मोहम्मद अहमद अशरफी ने नातिया कलाम पेश किया।

संचालन हाफिज मोहम्मद अरशद अली अशरफी ने किया। इस मौके पर हाफिज अब्दुर्रहीम बहराइची, मौलाना फतह मोहम्मद कादरी, मौलाना महमूद हसन अख्तर अलीमी, मौलाना सुफियान मिस्बाही, मौलाना मोअज्जम जामई, मौलाना मुहिब आलम, मौलाना मुहम्मद आजाद अशरफी, मौलाना गुल मोहम्मद जुमई, मौलाना कासिम मिस्बाही, कारी सैयद कासिम बरकाती आदि मौजूद रहे। 

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