नागपंचमी पर काशी में आस्था का सैलाब, बारिश के बीच बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
नागकूप में भी उमड़ी भीड़; बढ़ते गंगा जलस्तर के चलते नावों का संचालन बंद
नागपंचमी और सावन सोमवार पर काशी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। बाबा विश्वनाथ धाम में भक्तों का पुष्पवर्षा से स्वागत हुआ, जबकि बढ़ते गंगा जलस्तर के चलते नावों का संचालन बंद कर दिया गया।
वाराणसी। सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के पावन पर्व पर सोमवार को धर्मनगरी काशी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। रुक-रुककर हो रही बारिश भी भक्तों की आस्था को नहीं डिगा सकी।
श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से धाम में पुष्पवर्षा की गई। मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खोले गए, जिसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते रहे।
नागकूप में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
नागपंचमी के अवसर पर जैतपुरा स्थित प्राचीन नागकूप में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भक्तों ने विधि-विधान से नागदेवता का पूजन-अर्चन किया और दूध व लावा अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्यता है कि नागपंचमी के दिन नागकूप में पूजा करने से विभिन्न प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है।
बढ़ते गंगा जलस्तर से घाटों पर बढ़ी चिंता
उधर, गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण काशी के कई घाटों का संपर्क टूट गया है। घाटों पर स्थित कई मंदिर जलमग्न हो चुके हैं, जबकि शीतला मंदिर के द्वार तक गंगा का पानी पहुंच गया है। सुरक्षा के मद्देनजर गंगा में नावों का संचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। जल पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें श्रद्धालुओं से लगातार अपील कर रही हैं कि वे गहरे पानी में स्नान न करें और केवल चिन्हित व सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करें।
सावन के सोमवार और नागपंचमी के एक साथ पड़ने से काशी में धार्मिक उत्साह चरम पर रहा, वहीं गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह सतर्क हैं।
