संपादकीय : मिलावट पर वार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा त्योहारी मौसम में दूध, पनीर, खोया और घी इत्यादि में मिलावट का जोखिम बढ़ने से पहले डेयरी एनालॉग यानी दूध के विकल्पों से बने पनीर, घी, खोया और क्रीम जैसे उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला उपभोक्ता स्वास्थ्य और खाद्य शुचिता के पक्ष में एक जरूरी हस्तक्षेप है। एफएसएसएआई के अनुसार डेयरी एनालॉग वह उत्पाद है, जिसमें दूध के एक या अधिक प्रमुख घटकों की जगह गैर-दुग्ध घटक, जैसे वनस्पति वसा या प्रोटीन इस्तेमाल होता है। वह डेयरी एनालॉग के लिए अलग नियामकीय व्यवस्था और स्पष्ट लेबलिंग की बात करता रहा है, लेकिन इसे असली पनीर या दूध उत्पाद बताकर बेचना, हानिकारक डिटर्जेंट, घटिया तेल या संदूषक मिलना गंभीर खाद्य-सुरक्षा अपराध है। इसलिए यह प्रतिबंध उपभोक्ता को धोखे से बचाने और असली दुग्ध उद्योग की रक्षा करने की दृष्टि से दूरदर्शी है।
हालांकि वास्तविक एनालॉग डेयरी उत्पादों के स्वास्थ्य दुष्प्रभावों को प्रमाणित करने के लिए व्यवस्थित निगरानी और अध्ययन भी जरूरी होगा। अभी राष्ट्रीय स्तर पर एनालॉग दुग्ध उत्पादों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों का पर्याप्त कोई स्वतंत्र आकलन नहीं है। यह आर्थिक दृष्टि से भी दांव बड़ा है। 2025 में उत्तर प्रदेश का डेयरी बाजार अनुमानतः 2.33 लाख करोड़ रुपये का था और राष्ट्रीय डेयरी बाजार में उसकी हिस्सेदारी लगभग 18.7 प्रतिशत आंकी गई थी। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दूध उत्पादक भी है- 2024-25 में राष्ट्रीय दूध उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी 15.66 प्रतिशत रही। इसलिए इस प्रतिबंध का असर केवल नकली उत्पाद बनाने वाली इकाइयों पर नहीं, बल्कि सस्ते एनालॉग इस्तेमाल करने वाले होटल, रेस्तरां, कैटरर और मिठाई कारोबार पर भी पड़ेगा। मध्य प्रदेश ने भी हाल में इसी तरह का प्रतिबंध लगाया है, पर अभी उसके आर्थिक या स्वास्थ्य परिणाम का निष्पक्ष आकलन उजागर नहीं हुआ है। उसने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात के बाद यह कदम उठाया है।
सबसे जरूरी है स्रोत पर प्रहार दूध और वनस्पति वसा की खरीद का डिजिटल रिकॉर्ड, कच्चे माल की ट्रेसिंग, जोखिम आधारित नमूना जांच, मोबाइल प्रयोगशालाएं, थोक उत्पादकों का अनिवार्य लाइसेंस और एक बैच से जुड़े सभी विक्रेताओं की जवाबदेही। मिठाई बनने के बाद नकली पनीर या खोया पहचानना कठिन होता है, इसलिए केवल तैयार मिठाई नहीं, उसकी सामग्री और आपूर्तिकर्ता की भी जांच करनी होगी। यह भी याद रखना होगा कि मिलावट केवल पनीर में नहीं है। तेल, मसाले, मिठाइयां और अनेक खाद्य पदार्थ इसके शिकार हैं।
इसलिए एनालॉग डेयरी पर प्रतिबंध को व्यापक खाद्य-सुरक्षा सुधार की शुरुआत बनाना होगा। छोटे कस्बों और गांवों में इस प्रतिबंध का अनुपालन कठिन है, पर असंभव भी नहीं। यदि निगरानी स्रोत से खुदरा बाजार तक पहुंचे और अंतर्राज्यीय आपूर्ति पर भी कड़ा नियंत्रण हो, तो इससे बड़ा फर्क पड़ेगा। अगस्त से दीपावली तक उत्तर प्रदेश में मिठाई, खोया, पनीर और घी की मांग बढ़ेगी। अत: आगामी त्योहारी मांग को देखते हुए प्रवर्तन तेज करना स्वाभाविक है। मगर इसे केवल मौसमी अभियान बनाना विफलता को आमंत्रण होगा। प्रतिबंध घोषणा है, शुद्धता उसका परिणाम तभी बनेगी जब सरकार बाजार की पूरी आपूर्ति-श्रृंखला को पकड़े।
