संपादकीय : नौजवानों पर नजर

Amrit Vichar Network
Edited By Pradeep Kumar
On

2027 विधानसभा चुनाव और युवा मतदाता, रोजगार और शिक्षा पर क्या है योगी सरकार का प्लान?

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले युवाओं को साधने में जुटी राजनीतिक पार्टियां। पढ़ें सीएम योगी की योजनाओं और युवा मतदाताओं पर हमारा खास संपादकीय।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ‘युवा मतदाता’ सियासत का महत्वपूर्ण मोर्चा बनता जा रहा है। “बदलता पूर्वी उत्तर प्रदेश” कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह आह्वान कि युवाओं को नौ-दस वर्ष पहले के बदहाल उत्तर प्रदेश और आज के बुनियादी बदलाव से परिचित कराया जाए, शासन की उपलब्धियों गिनाने से ज्यादा आगामी चुनावों के लिए एक सुविचारित और स्पष्ट राजनीतिक संदेश है। पार्टी अपने विकास, कानून-व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार संबंधी दावों को युवा पीढ़ी की स्मृति का स्थाई हिस्सा बनाकर विपक्ष को युवाओं के रोजगार, शिक्षा और अवसर के संवेदनशील सवालों पर राजनीतिक बढ़त लेने से पहले ही बैकफुट पर धकेलना चाहती है। हालांकि अतीत की तुलना या ‘अतीत का भय’ युवा पीढ़ी को कितना प्रभावित करेगी यह अलग सवाल है, क्योंकि आज का युवा अपने वर्तमान की ठोस स्थिति और भविष्य के अवसरों का हिसाब चहता है। मुख्यमंत्री का यह कहना सही है कि 2016-17 में उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय महज 43 से 48 हजार रुपये के दायरे में सिमटी थी, जो 2025-26 के बजट अनुमानों में बढ़कर करीब 1.20 लाख रुपये तक पहुंच गई और इसी अवधि में राज्य की अर्थव्यवस्था 13.30 लाख करोड़ रुपये से लगभग 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इस दौरान तीन नए विश्वविद्यालय भी खुले हैं। बेशक, उच्च शिक्षा और बुनियादी ढांचे में पूर्वांचल की तस्वीर बदली है। आजमगढ़ में महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय और गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों ने क्षेत्रीय स्तर पर अवसर बढ़ाए हैं। गोरखपुर के एमएमएमयूटी, वाराणसी के आईआईटी-बीएचयू और चिकित्सा संस्थान ने राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष स्थान बनाकर साख दर्ज की है, लेकिन 2014-15 से 2023-24 के दौरान राज्य में सरकारी विद्यालयों की संख्या में 25,126 की कमी आई है। खेल के मोर्चे पर वाराणसी और गोरखपुर के अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम तथा 534 पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी देने के दावे युवाओं में नई ऊर्जा भरते हैं।

इन सबके बावजूद धरातल पर खड़े पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण युवा की असली प्राथमिकता चमकदार परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। उसे स्थानीय स्तर पर पारदर्शी रोजगार, सस्ती कोचिंग, कृषि में बेहतर आय और छोटे कारोबार के लिए आसानी से पूंजी चाहिए। वहीं, शहरी युवा निजी क्षेत्र में बेहतर वेतन, गुणवत्तापूर्ण जॉब और स्टार्टअप इकोसिस्टम चाहता है। ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के तहत सालाना 1 लाख युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त और बिना गारंटी ऋण देने की योजना एक सराहनीय पहल है, लेकिन अब वक्त आ गया है कि सरकार इसके जमीनी परिणामों के बारे में यानी कितने कारोबार टिके और कितने वास्तविक रोजगार बने-को सार्वजनिक करे। 2027 की चुनावी युवा राजनीति को वही दल जीत पाएगा, जो युवाओं को केवल एक वोट बैंक नहीं, बल्कि भविष्य का वास्तविक भागीदार मानेगा। उम्मीद है कि सरकार के भर्ती कैलेंडर का पालन, समयबद्ध पारदर्शी परीक्षाएं, ग्रामीण स्टार्टअप्स को बाजार देना और कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर जैसे कदम राजनीतिक भाषणों को जमीनी अनुभव में बदल देंगे।

ये भी पढ़ें - संपादकीय : लाठी नहीं जवाबदेही