World Mosquito Day : डेंगू से आगे निकला मलेरिया, आठ साल के आंकड़ों में 125% ज्यादा मामले

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Edited By Anjali Singh
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आठ साल के आंकड़ों में बदली तस्वीर, 2026 में अब तक डेंगू के 92 तो मलेरिया के 207 मामले

विश्व मच्छर दिवस पर सामने आए आंकड़े मच्छरजनित बीमारियों के बदलते ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं। पिछले आठ वर्षों में डेंगू की तुलना में मलेरिया के मामलों में 125 प्रतिशत अधिक मामले दर्ज किए गए।

पंकज द्विवेदी/लखनऊ, अमृत विचार : लखनऊ में इस बार मच्छर जनित बीमारियों के आंकड़े बीमारी के बदलते रुख की ओर इशारा कर रहे हैं। पिछले वर्षों की तुलना में डेंगू के मामले तो काफी कम हैं, लेकिन मलेरिया मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इस वर्ष 19 अगस्त डेंगू के 92 मरीज सामने आए, जबकि मलेरिया के मरीजों की संख्या 207 पहुंच चुकी है।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 में डेंगू के 2162 और मलेरिया के 146 मरीज सामने आए थे। वर्ष 2020 में डेंगू मरीजों की संख्या 882 और मलेरिया के मरीजों की 25 रिकार्ड की गई थी। वर्ष 2021 में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़कर 1978 और मलेरिया के 34 पहुंच गई थी। वर्ष 2022 में डेंगू का प्रकोप बढ़ने से मरीजों की संख्या 2648 तक पहुंच गई थी।

इसी साल मलेरिया के भी 157 मरीज मिले थे। वर्ष 2023 में डेंगू के 2749 और मलेरिया के 97 मरीज मिले। वर्ष 2024 में डेंगू ने आठ वर्ष के आंकड़ों में सबसे ऊंचा स्तर छुआ। इस साल डेंगू के 3244 मरीज मिले जबकि मलेरिया मरीजों की संख्या 492 हो गई। वर्ष 2025 में स्थिति कुछ सुधरी और डेंगू के मरीज 930 ही मिले, किंतु मलेरिया ने नया रिकॉर्ड बनाया और मरीजों की संख्या 676 पहुंच गई।

इस वर्ष 19 अगस्त तक डेंगू के 92 और मलेरिया के 207 मरीज सामने आ चुके हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 तक डेंगू हावी रहा, लेकिन वर्ष 2025 से मलेरिया के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में बारिश और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के बीच मलेरिया की रोकथाम स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

एक नजर में आठ साल के आंकड़े 

वर्ष             डेंगू             मलेरिया

2019            2162             146

2020             882             25
2021            1978             34

2022            2648             157
2023            2749             97

2024            3244             492
2025             930             676

2026             92             207

नोट : वर्ष 2026 के आंकड़े जनवरी से 19 अगस्त तक हैं।

मच्छरों की ये नस्ल खतरनाक

एडीज मच्छर: डेंगू, चिकनगुनिया और येलो फीवर जैसी बीमारियां होती हैं। यह मच्छर दिन के समय, खासकर सुबह और शाम के समय काटते हैं। साफ पानी में अंडे देते हैं जैसे कि बर्तन, कूलर, टायर, और फूलदान में जमा पानी। इनकी दो प्रमुख प्रजातियां हैं, एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस। एडीज मच्छर की पहचान इसके काले शरीर और सफेद धारियों से होती है, खासकर पैरों पर। जब ये मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटते हैं तो वे वायरस को अपने अंदर ले लेते हैं। इसके बाद जब ये किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटते हैं तो वायरस उस व्यक्ति में चला जाता है, जिससे बीमारी फैल जाती है।


एनोफिलीज मच्छर : इनके काटने से मलेरिया होता है। ये मच्छर रुके हुए साफ पानी में पैदा होते हैं। रात के वक्त काटते हैं। सिर्फ मादा एनोफिलीज मच्छर ही इंसानों का खून चूसती है। ये मच्छर पतले और लंबे होते हैं। जब ये कहीं बैठते हैं, तो इनका पेट ऊपर की तरफ उठा रहता है।


क्यूलेक्स मच्छर : इनकी वजह से फाइलेरिया और जापानी इंसेफेलाइटिस होता है। ये मच्छर गंदे पानी में पनपते हैं। शाम या रात के समय काटते हैं। तालाबों, झीलों व खेतों में पनपते हैं। क्यूलेक्स मच्छर भूरे रंग के होते हैं और इनके शरीर पर कोई खास धारियां नहीं होती हैं। मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है। लोग लापरवाही न बरतें अपने आसपास ऐसी स्थिति उत्पन्न न होने दें। जिससे मच्छर पनप सकें।

-डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ

मलेरिया विभाग में ही पनप रही मच्छरों की नर्सरी

-नवल किशोर रोड सीएचसी परिसर में खुले में पड़े हैं कीटनाशक के ड्रम, बारिश का पानी भरने से पनप रहे मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए इस्तेमाल होने वाला कीटनाशक ही लापरवाही के चलते मच्छरों के पनपने का जरिया बन रहा है। नवल किशोर रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परिसर में मैलाथियान टेक्निकल से भरे ड्रम खुले में पड़े हैं। इन ड्रमों के ऊपर बारिश का पानी जमा होने से मच्छर पनप रहे हैं।

खास बात यह है कि इसी परिसर में मलेरिया विभाग का कार्यालय भी संचालित होता है। इसके बावजूद कीटनाशक के ड्रमों को खुले में रखने और उनमें पानी जमा होने से रोकने के लिए कोई प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आ रहा है।

बारिश के मौसम में खुले कंटेनर और उनमें जमा साफ पानी मच्छरों के लिए अनुकूल प्रजनन स्थल बन सकते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ही इस तरह पानी जमा होना मच्छर नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। एक ओर स्वास्थ्य विभाग डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के लिए अभियान चलाता है, वहीं दूसरी ओर उसके ही परिसर में मच्छरों के पनपने की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने कहा इसकी जांच कराई जाएगी। अस्पताल परिसर में ऐसी लापरवाही बर्दास्त नहीं।

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