World Entrepreneur Day : BMIIL देगा युवाओं के सपनों को ऊंची उड़ान 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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आज वर्ल्ड एंटरप्रेन्योर डे है। अगर आप कोई नया उद्यम शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले एक अच्छा विचार आपके मन में आएगा। महज एक अच्छा विचार सफल व्यवसाय बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होता। एक विचार को मूर्त रूप में आने के लिए सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग, बाजार की समझ, पूंजी, कार्यस्थल और अनुभवी मेंटर्स नेटवर्क की भी जरूरत होती है।
BMIIL to help
 
बरेली ही नहीं पूरे रुहेलखंड रीजन के युवा अपने विचारों को वास्तविक उत्पादों, सेवाओं और सफल स्टार्टअप में कैसे बदल सकते हैं? क्या उन्हें सपनों को पूरा करने के लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या विदेश जाना जरूरी है, या फिर वर्ल्ड क्लास इनोवेशन की शुरुआत बरेली से भी हो सकती है? बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में स्थापित BMIIL (बरेली मेडटेक इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन लैब्स) टियर-2 शहरों में पहला खास मेडिकल टेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर है। बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में स्थित यह सेंटर, हेल्थकेयर और आयुष स्टार्टअप्स को नई शुरुआत में मदद करने के लिए क्लिनिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटरशिप की सुविधा देता है। युवाओं के सपनों को साकार करने की ये एक शानदार शुरुआत है। 
 
 
आज भारत उन कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो काफी स्वस्थ गति से बढ़ रही हैं, जिसकी युवा आबादी महत्वाकांक्षी है और तकनीक के साथ लगातार सहज हो रही है। स्मार्टफोन की पहुंच तीन-चौथाई आबादी को पार कर चुकी है और डिजिटल भुगतान का उपयोग अब एक कप चाय जैसी छोटी खरीदारी के लिए भी किया जा रहा है। यह कहानी अब बेंगलुरु के टेक कॉरिडोर या मुंबई के वित्तीय टावरों तक ही सीमित नहीं है। बरेली के एक युवा के पास स्मार्टफोन के माध्यम से लगभग वैसी ही जानकारी, टूल्स और कैपिटल मार्केट तक पहुंच है, जैसी किसी भी मेट्रो शहर के युवा के पास होती है। कमी केवल उस पहुंच को एक चलते हुए बिजनेस में बदलने वाले लोकल स्ट्रक्चर की है।
 
इन उपलब्धियों के बावजूद दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों के युवाओं के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। इनमें प्रमुख तौर पर-अनुभवी मेंटर्स तक सीमित पहुंच, प्रोटोटाइप बनाने के लिए तकनीकी सहयोग का अभाव, इंडस्ट्री और इन्वेस्टर्स से संपर्क की कमी, रेगुलेटरी और इंटलैक्चुअल प्रॉपर्टी संबंधी जानकारी का अभाव, बिजनेस मॉडल और मार्केट स्ट्रैटजी विकसित करने में कठिनाई, शुरुआती पूंजी और सीड फंडिंग तक सीमित पहुंच शामिल हैं। इन्क्यूबेशन सेंटर्स इन कमियों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
 
हम बरेली की बात करें तो यह शहर अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से काफी महत्वपूर्ण है, जो इसे एक उभरते इनोवेशन सेंटर के रूप में विकसित होने की संभावना देती है। यह शहर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अनेक जिलों को जोड़ता है। साथ ही शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, व्यापार और लॉजिस्टिक्स का महत्वपूर्ण क्षेत्रीय केंद्र है। बरेली या फिर रुहेलखंड में हेल्थकेयर, खेती-किसानी, फूड प्रॉसेसिंग, शिक्षा, लॉजिस्टिक्स, हस्त शिल्प, रिटेल, रिनिवेबल एनर्जी और डिजिटल सर्विस जैसे अनेक क्षेत्रों में वास्तविक समस्याएं मौजूद हैं। यही समस्याएं नए स्टार्टअप और बिजनेस सोल्यूशन के लिए अवसर बन सकती हैं।
 

‘Bareilly to the World’ केवल  एक नारा नहीं

youth soar high

लंबे समय से छोटे शहरों में यह धारणा रही है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए युवाओं को महानगरों की ओर जाना ही पड़ेगा, लेकिन डिजिटल इकोनॉमी और इंक्यूबेशन और इकोसिस्टम इस धारणा को बदल रहे हैं। बरेली और रुहेलखंड के युवाओं को अपने क्षेत्र की समस्याओं की वह समझ है, जो बाहर से आने वाले किसी व्यक्ति के पास स्वाभाविक रूप से नहीं हो सकती। यदि इस लोकल अंडरस्टैंडिंग को टेक्नोलॉजी, मेंटरिंग, रिसर्च और कैपिटल का साथ मिले, तो यहां विकसित समाधान केवल रुहेलखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और दुनिया के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
 
BMIIL इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है। इसका संदेश स्पष्ट है बरेली के विचारों को बरेली तक सीमित रहने की आवश्यकता नहीं है। यदि विश्वविद्यालय, इंडस्ट्री, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स और युवा इनोवेटर्स एक साझा मंच पर आएं, तो आने वाले वर्षों में रुहेलखंड केवल स्किल्ड मैन पॉवर उपलब्ध कराने वाला क्षेत्र नहीं, बल्कि नए प्रोडक्स्टस इंटरप्राइजेज और हेल्थकेयर सोल्यूशन विकसित करने वाला इनोवेशन हब बन सकता है।
 

स्टूडेंट्स के लिए स्टार्टअप के संभावित अवसर

youth

 

मेडटेक

कम लागत वाले मेडिकल डिवाइसेज
पोर्टेबल डॉयग्नोस्टिग इक्विपमेंट 
असिस्टिव टेक्नोलॉजी
रिहैबिलिटेश डिवाइसेज
रिमोट पेशेंट मॉनीटरिंग सिस्टम 
 

डिजिटल हेल्थ 

टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म्स
पेशेंट-सपोर्ट एप्लिकेशन्स
इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ-रिकॉर्ड सोल्यूशन्स
हॉस्पिटल वर्कफ्लो मैनेजमेंट
रूरल हेल्थकेयर कनेक्टिविटी
 

डेंटल इनोवेशन

डायग्नोस्टिक डिवाइसेज
पेशेंट-केयर टेक्नोलॉजी
अफोर्डेबल डेंटल इक्विपमेंट
डिजिटल डेंटल-रिकॉर्ड सिस्टम्स
 

फार्मेसी इनोवेशन

स्मार्ट मेडिकेशन-मैनेजमेंट सिस्टम्स
ड्रग अडेरेंस सॉल्यूशन्स
सप्लाई-चेन मॉनिटरिंग
फार्मेसी इन्वेंटरी टेक्नोलॉजी
 

आयुष और टेक्नोलॉजी

ट्रेडिशनल हेल्थकेयर नॉलेज का साइंटिफिक डॉक्यूमेंटेशन
वेलनेस और प्रिवेंटिव-केयर प्लेटफॉर्म्स
हर्बल प्रोडक्ट्स की क्वालिटी मॉनिटरिंग
टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड आयुष सर्विसेज
 

किन विद्यार्थियों और इनोवेटर्स के लिए है BMIIL

dreams of youth
 
BMIIL का प्लेटफार्म विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों और प्रोफेशनल्स के लिए खुला है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-मेडिकल और मेडटेक, नर्सिंग, फार्मेसी, डेंटल साइंसेज, आयुष और आयुर्वेद, लाइफ साइंस, एआई और डाटा साइंस, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर मैनेजमेंट। हेल्थकेयर इनोवेशन अक्सर किसी एक विषय से संभव नहीं होता। एक डॉक्टर मरीज की समस्या पहचान सकता है। इंजीनियर उसका तकनीकी समाधान बना सकता है। डिजाइनर उसे उपयोगकर्ता के अनुकूल बना सकता है और मैनेजमेंट प्रोफेशनल उसे सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल में बदल सकता है, इसलिए BMIIL बहुविषयक सहयोग को इनोवेशन की बुनियादी जरूरत मानता है। 
 

इंक्यूबेशन सेंटर क्या सहायता उपलब्ध कराता है

 
किसी इंक्यूबेशन सेंटर की भूमिका सिर्फ ऑफिस स्पेस उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होती। वह विचार और बाजार के बीच एक पुल की तरह काम करता है। BMIIL में चुनिंदा स्टार्टअप इनोवेशन को आवश्यकता एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निम्नलिखित सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है
 
=स्टार्टअप मेंटरिंग: अनुभवी मेंटर्स के माध्यम से समस्या की पहचान, बिजनेस प्लानिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मार्केट स्ट्रैटजी का मार्गदर्शन।
 
=प्रोटोटाइप सपोर्टः विचार को शुरुआती मॉडल या प्रोटोटॉइप में बदलने के लिए तकनीकी और इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट। 
 
=इंडस्ट्री कनेक्टः हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशन्स, टेक्नोलॉजी कंपनियां, मैन्यूफैक्चरर्स, हॉस्पिटल्स और अन्य इंडस्ट्री पार्टनर्स से संपर्क स्थापित करने में सहायता।
 
=इनोवेशन ट्रेनिंगः डिजाइन थिंकिंग, एंटरप्रेन्योरशिप, एआई, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और इनोवेशन मैनेजमेंट से संबंधित वर्कशॉप्स और कोर्सेज। 
 
=कोवर्किंग और कोलाब्रेशन स्पेसः फाउंडर्स तथा मल्टीडिस्पिलिनरी टीम्स के लिए साथ बैठकर अपने विचार पर कार्य करने की सुविधा।
 
=एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंटः बिजनेस मॉडल, फाइनेंशियल प्लानिंग, मार्केट वैलिडेशन, ब्रांडिंग और इंटरप्राइज मैनेजमेंट को समझने में सहायता। 
 
=रेगुलेटरी और डॉक्यूमेंटेशन सपोर्टः हेल्थकेयर इनोवेशन से जुड़े डाटा शेयरिंग प्रोटोकाल्स, इनक्यूबेटी एग्रीमेंट्स, इंटैल्कचुअल प्रॉपर्ट प्रोटेक्शन और रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट पर मार्गदर्शन। 
 
=सीड फंडिंग फैसिलिटेशनः योग्य और चयनित स्टार्टअप को उपलब्ध स्कीमस्, इंस्टीट्यशनल सपोर्ट, ग्रांट्स, इन्वेस्टर्स के साथ ही सीड फंडिंग अपार्चुनिटीज से जोड़ने का प्रयास।
 

BMIIL: विचार से प्रभाव तक

Entrepreneur

 
BMIIL बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का हेल्थकेयर और मेडटेक केंद्रित इनक्यूबेशन प्लेटफार्म है। इसका मकसद स्टूडेंट्स, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, शोधार्थी और एसप्रिंग एंटरप्रेन्योर्स को उनके विचारों को उपयोगी उत्पाद या सेवा में बदलने के लिए आवश्यक इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है। BMIIL स्वयं को उत्तर भारत के शुरुआती मेड टेक पर केंद्रित इंक्यूबेशन प्लेटफार्म्स में से एक के रूप में विकसित कर रहा है। इसकी मूल भावना को उसकी टैगलाइन से समझा जा सकता है। इसकी टैगलाइन है- ‘Innovate to Heal-From Campus to Clinic.’ अर्थात इनोवेशन को सिर्फ लैब या क्लासरूम तक सीमित न रखकर उसे अस्पताल, क्लिनिक और मरीज तक पहुंचाना।
 
BMIIL एक नॉट फॉर प्रोफिट संस्था के तौर पर काम करती है। इसका उद्देश्य केवल कॉमर्शियल रिटर्न अर्जित करना नहीं, बल्कि हेल्थकेयर इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप और व्यापक सामाजिक प्रभाव को प्रोत्साहित करना है। इसका मुख्य केंद्र मेडटेक और हेल्थकेयर है, लेकिन इसके द्वारा विकसित इंक्यूबेशन मॉडल रुहेलखंड में अन्य क्षेत्रों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी प्रेरित कर सकता है।
 

वायस ऑफ लीडरशिप

 
-डॉ. केशव अग्रवाल
 
 
किसी विश्वविद्यालय की वास्तविक सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि वह कितनी डिग्रियां देता है, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि उसके छात्र आगे चलकर किन समस्याओं का समाधान करते हैं।
 
-डॉ. लता अग्रवाल
 
हम चाहते हैं कि बीआईयू (BIU) की हर कक्षा एक ऐसी जगह बने, जहां जिज्ञासा को केवल परीक्षा का उत्तर नहीं, बल्कि एक प्रोटोटाइप में बदलने की अनुमति हो।
 
-डॉ. वरुण अग्रवाल
 
हमारा दृष्टिकोण एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है, जहां स्वास्थ्य सेवा की चुनौतियां नवाचार को प्रेरित करें और इनोवेटिव विचारों को प्रभावशाली मेडटेक समाधानों में बदला जा सके।
-डॉ. अर्जुन अग्रवाल
हमारे रुहेलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट में हमें हर दिन इनोवेशन के नए मौके दिखाई देते हैं। डायग्नोस्टिक्स में AI की मदद से इंजीनियरिंग, मेडिसिन और डिज़ाइन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के छात्र एक साथ आकर ज़बरदस्त इनोवेशन कर सकते हैं।
-क्लॉडियस वाल्टर लाजरस
 
हम हाई-टेक उपकरणों और रोबोटिक्स के साथ पूरी तरह से सहज हैं, लेकिन हम वास्तव में कुछ सरल और कार्यात्मक (functional) तलाश रहे हैं- एक ऐसा विचार, जिसमें जीवन बदलने की क्षमता हो। अक्सर, यह कोई क्रांतिकारी आविष्कार नहीं होता है। यह पहले से मौजूद किसी चीज़ के डिज़ाइन में किया गया थोड़ा सा बदलाव होता है, जो जीवन और लागत दोनों बचा सकता है।
 

 

 

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