कानपुर में 26 अगस्त को निकलेगा जुलूस-ए-मोहम्मदी, सियासी नारे और झंडों पर रोक; लाखों लोगों के जुटने का दावा
जुलूस-ए-मोहम्मदी के लिए गाइडलाइन जारी, राजनीतिक नारे-बैनर पर पाबंदी
कानपुर, अमृत विचार। 26 अगस्त बुधवार को पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर परेड ग्राउंड से जुलूस ए मोहम्मदी निकाला जाएगा। जुलूस में किसी राजनीतिक पार्टी या सियासी नारों पर रोक लगा दी गई है। सोमवार को शहर जमीयत उलमा के संयोजक एवं जमियत के प्रदेश महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्ला कासमी, शहर अध्यक्ष डॉ हलीमुल्लाह खां ने पत्रकारों को ये जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बुधवार को सुबह से ही अंजुमन अपना टोकन परेड ग्राउंड से ले सकते हैं। इस ऐतिहासिक जुलूस में लाखों लोग शिरकत करेंगे। उन्होंने बताया कि जुलूस की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। ये जुलूस देश के विभाजन के बाद जब सांप्रदायिकता अपने चरम पर थी, तब भी जुलूस ने कानपुर सहित पूरे क्षेत्र में शांति और भाईचारे का माहौल कायम रखने में अहम ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
1948 में इसमें कोई व्यकि या संस्था इस जुलूस को निकालने के लिए तैयार नहीं था, तब जमीयत उलमा शहर कानपुर ने इसकी बागडोर संभाली। तभी से यह जुलूस हर जुलूस को निकालते हुए 18 साल पूरे हो चुके हैं और इस बार इसे 79वां कानपुर के नेतृत्व में निकाला जा रहा है।
जुलूस के लिए गाइड लाइन जारी
मौलाना ने कहा कि जुलूस में शामिल होने वाले इस्लामी तहजीब और शिष्टता का प्रदर्शन करें।
1- झंडों की ऊंचाई इतनी अधिक न हो कि वे बिजली के तारों से टकराएं, इसलिए फीट से ज्यादा लंबा झंडा हरगिज न रखें।
2-लाउडस्पीकर की संख्या 2 से अधिक न हो, और साउंड सिस्टम सिस्टम की आज बहुत ज्यादा तेज न रखें, बल्कि उसे संतुलित रखें।
3- किसी भी प्रकार के राजनीतिक नारे, झंडे, बैनर और बैज का इस्तेमाल न करें। के दौरान कोई ऐसा नारा न लगाया जाए और न ही कोई ऐसा गीत गाया जाए, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
4- रास्ते बहुत खराब हैं. इसलिए लोडरों के ऊपर पटरा बिछाकर न बैठें। इससे गाड़ी असंतुलित होगी और गिरने का खतरा पैदा होगा।
एक दूसरे के त्यौहार का ख्याल रखें
जमीयत उलमा के शहर अध्यक्ष डॉ हलीमुल्लाह खां ने मुसलमानों से अपील की कि दूसरे के साथ ऑपसी प्रेम और भाईचारे के साथ उनके एक-दो दिन बाद हमारे हिंदू भाइयों का भी त्योहार है। इसलिए हमें एक-दूस त्योहार का भी सम्मान करना है। धैर्य और संयम का प्रदर्शन करना है और अपनी तरफ से कोई ऐसा काम नहीं करना है जो किसी लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाएं हैं और यही उनके प्रति दूसरे को तकलीफ पहुंचाने का कारण बने। यही अल्लाह हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
