जिंदगी का सफर: मंदाकिनी, फिल्मों से अध्यात्म की ओर

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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कुछ चेहरे पर्दे पर आते हैं और कुछ ही समय में दर्शकों की यादों का हिस्सा बन जाते हैं। यासमीन जोसेफ भी ऐसा ही एक नाम हैं, जिन्हें दुनिया ने बाद में मंदाकिनी के नाम से पहचाना। मेरठ में 30 जुलाई 1963 को जन्मीं यासमीन ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, तो शायद उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि एक फिल्म उनकी जिंदगी को इतनी तेजी से बदल देगी।

बचपन से ही अभिनय की दुनिया उन्हें आकर्षित करती थी। मुंबई पहुंचकर उन्होंने फिल्मों में काम पाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती दौर आसान नहीं था। उन्हें कई बार असफलता और रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया जब लगातार कोशिशों के बावजूद उन्हें फिल्मों में मौका नहीं मिल पा रहा था, लेकिन यासमीन ने हार नहीं मानी। यही जिद आगे चलकर उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ बनी।

करीब 22 वर्ष की उम्र में उनकी मुलाकात फिल्मकार राज कपूर से हुई। राज कपूर ने उनका स्क्रीन टेस्ट लिया और उनकी प्रतिभा व व्यक्तित्व से प्रभावित होकर, उन्हें अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म राम तेरी गंगा मैली में मुख्य भूमिका के लिए चुना। इसी दौरान यासमीन जोसेफ को नया स्क्रीन नाम मिला- मंदाकिनी।

वर्ष 1985 में रिलीज हुई राम तेरी गंगा मैली ने मंदाकिनी को रातों-रात स्टार बना दिया। राजीव कपूर के साथ उनकी जोड़ी और फिल्म में निभाया गया ‘गंगा’ का किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। फिल्म के कुछ दृश्यों ने उस दौर में जबरदस्त चर्चा और विवाद भी पैदा किया। देखते ही देखते मंदाकिनी 1980 के दशक के चर्चित चेहरों में शामिल हो गईं।

इसके बाद उन्होंने डांस डांस, कमांडो, प्यार के नाम कुर्बान, प्यार करके देखो और तेजाब जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि उनकी पहली फिल्म जैसी सफलता दोबारा नहीं मिल सकी। धीरे-धीरे फिल्मों की संख्या कम होती गई और 1996 की जोरदार के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया से दूरी बना ली।

मंदाकिनी की जिंदगी का एक और महत्वपूर्ण अध्याय उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा है। वर्ष 1990 में उन्होंने डॉ. काग्युर टी. रिनपोचे ठाकुर से विवाह किया, जो पूर्व बौद्ध भिक्षु रहे हैं। इसके बाद उनका जीवन ग्लैमर की चकाचौंध से दूर आध्यात्म और परिवार की ओर बढ़ा।

फिल्मों से दूर होने के बाद मंदाकिनी ने तिब्बती योग और ध्यान से जुड़ा काम शुरू किया। कभी बड़े पर्दे पर अपनी खूबसूरती और अभिनय से सुर्खियां बटोरने वाली मंदाकिनी ने बाद के जीवन में शांति और आध्यात्म को अधिक महत्व दिया। यासमीन जोसेफ से मंदाकिनी बनने और फिर फिल्मी दुनिया से दूर अपनी अलग पहचान बनाने तक का यह सफर बताता है कि जिंदगी हमेशा एक ही दिशा में नहीं चलती। कभी संघर्ष, कभी शोहरत और कभी विवाद इन सबके बीच इंसान अपने लिए एक नया रास्ता भी चुन सकता है। मंदाकिनी की कहानी इसी बदलाव, धैर्य और नए जीवन की तलाश की कहानी है। 

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