लखनऊ कोर्ट परिसर अतिक्रमण मामला : चैंबर ध्वस्तीकरण के खिलाफ दायर अर्जी पर कोर्ट करेगा सुनवाई

Amrit Vichar Network
Edited By Virendra Pandey
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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें लखनऊ जिला अदालत परिसर के पास कथित तौर पर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण करके बनाए गए वकीलों के चैंबरों को तोड़ने का निर्देश दिया गया था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को एक वकील ने बताया कि तोड़फोड़ के नोटिस जारी किए जा चुके हैं और 30 अगस्त को कार्रवाई प्रस्तावित है।

 प्रधान न्यायाधीश ने शुरू में अधिवक्ता से पूछा कि उच्च न्यायालय का रुख क्यों नहीं किया जा सकता। इस पर वकील ने कहा कि तोड़फोड़ का निर्देश स्वयं उच्च न्यायालय ने दिया है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "वे अनधिकृत चैंबर होंगे।" हालांकि, वकील ने दलील दी कि ये चैंबर करीब 40 वर्षों से अस्तित्व में हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "हम देखेंगे।" उन्होंने सुनवाई के लिए कोई तारीख तय नहीं की। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वकील तोड़फोड़ नोटिस का जवाब दाखिल कर सकते हैं। इस पर वकील ने कहा कि नोटिस तोड़फोड़ की कार्रवाई आगे बढ़ाने के इरादे से जारी किए गए हैं।

छह अगस्त को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) को लखनऊ जिला अदालत परिसर के पास सार्वजनिक रास्तों या सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कथित तौर पर चैंबर और अन्य ढांचे बनाने वाले 72 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था। इनमें ज्यादातर अधिवक्ता हैं। उच्च न्यायालय ने कथित अतिक्रमणकारियों को या तो इन ढांचों को खाली करने या भूमि और निर्माण पर अपने वैध अधिकार को साबित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि ऐसा करने में विफल रहने पर एलएमसी तोड़फोड़ की कार्रवाई कर सकता है। 

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