Hockey World Cup से भारत बाहर, श्रीजेश ने उठाए तीखे सवाल- ‘वर्ल्ड कप कोई रिहर्सल नहीं’

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम दूसरे राउंड में बाहर हो गईं। इसके बाद पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने टीम की तैयारी, जिम्मेदारी और प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि विश्व कप को अगले टूर्नामेंट की तैयारी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

नई दिल्ली: हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय पुरुष और महिला टीमों का अभियान दूसरे राउंड में ही खत्म हो गया। पुरुष टीम को नीदरलैंड और अर्जेंटीना के खिलाफ हार के बाद प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। इसके साथ ही भारतीय पुरुष हॉकी टीम का 1975 के बाद विश्व कप में पदक जीतने का इंतजार और लंबा हो गया।

भारत के विश्व कप से बाहर होने के बाद पूर्व गोलकीपर और ओलंपिक पदक विजेता टीम का हिस्सा रहे पीआर श्रीजेश ने सोशल मीडिया पर भारतीय हॉकी की तैयारियों और जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठाए।

‘वर्ल्ड कप कोई रिहर्सल नहीं है’

श्रीजेश ने अपनी पोस्ट में टीम के प्रदर्शन को लेकर सीधे सवाल करते हुए कहा कि विश्व कप को सीखने के अनुभव या भविष्य के टूर्नामेंट की तैयारी के रूप में देखने की सोच पर पुनर्विचार की जरूरत है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारतीय टीम का लक्ष्य सिर्फ अच्छी हॉकी खेलना है या फिर दुनिया की शीर्ष टीमों को हराने में सक्षम टीम तैयार करना।

श्रीजेश के मुताबिक, किसी शीर्ष टीम से हार को सीखने का अनुभव और किसी एशियाई टीम के खिलाफ जीत को शानदार प्रदर्शन बताना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना था कि विश्व कप किसी आगामी प्रतियोगिता की रिहर्सल नहीं है, बल्कि अपने आप में सबसे बड़ा मंच है।

महिला टीम के मुख्य कोच को लेकर भी सवाल

पूर्व भारतीय गोलकीपर ने महिला टीम की तैयारी को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विश्व कप से ठीक पहले महिला टीम के मुख्य कोच छुट्टी पर थे।

श्रीजेश ने खिलाड़ियों के जुझारूपन की सराहना करते हुए कहा कि टीम ने ऐसी स्थिति में भी पूरी ताकत से मुकाबला किया और उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि तैयारी के अंतिम चरण में मुख्य कोच की गैरमौजूदगी के बावजूद टीम से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

‘जिम्मेदारी कहां है?’

श्रीजेश ने भारतीय हॉकी में जवाबदेही के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने पूछा कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन की चर्चा के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करने को लेकर सवाल कौन उठाएगा।

उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या टीम की असफलता के बाद अगले टूर्नामेंट का हवाला देकर मौजूदा कमियों को नजरअंदाज किया जा सकता है।

उनकी पोस्ट के अंत में सवाल था कि मुश्किल सवाल कौन पूछेगा और जिम्मेदारी की मांग कौन करेगा। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या वास्तव में किसी को इसकी परवाह है।

1975 के बाद पदक का इंतजार जारी

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 1975 में विश्व कप का खिताब जीता था। इसके बाद से टीम विश्व कप में दोबारा पदक हासिल नहीं कर सकी है। 2026 में भी अभियान जल्दी खत्म होने के बाद यह इंतजार जारी है।

भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमों के बाहर होने के बाद अब श्रीजेश की टिप्पणियों ने टीम की तैयारी, कोचिंग और जवाबदेही को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।

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