Badaun News : बदायूं में गंगा के रौद्र रूप से सहमे ग्रामीण, 62 बीघा से ज्यादा जमीन नदी में समाई, खुद तोड़ने लगे मकान
खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा, गांव छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर जा रहे ग्रामीण
कदमनगला गांव कटान के मुहाने पर खड़ा है। ग्रामीण अपना मकान खुद ही तुड़वा रहे हैं। ताकि समय रहते ईंट, सरिया निकाल ली जाए। भविष्य में कहीं दूसरी जगह पर अपना ठिकाना बना सकें। अमित कुमार का घर 300 गज में बना था। बड़ी शिद्दत के साथ आशियाना तैयार किया था। लेकिन नदी के रौद्र रूप ने उसे तोड़ने पर मजबूर कर दिया।
अमृत विचार : बदायूं में गंगा नदी का कहर जारी है। उसहैत क्षेत्र में खेत-खलिहान और पेड़ नदी में समाते जा रहे हैं। अब तक करीब 62 बीघा से ज्यादा जमीन कट चुकी है। गंगा खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर बहर रही है। ग्रामीणों में दहशत है। डर के मारे वे खुद ही अपने मकान तुड़वाने लगे हैं। ईंट-सरिया और अन्य सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों का रुख कर रहे हैं। अब तटबंध पर भी संकट बनने लगा है।
उसहैत में लोकपाल, लालाराम, रामसिंह, श्याम सिंह, पुष्पेंद्र, राजेश, जयपाल, लालाराम, रक्षपाल, मोरपाल और जयवीर समेत अन्य किसानों की 62 बीघा से ज्यादा जमीन नदी में समा गई। खेत पर खड़े यूकेलिप्टिस के पेड़ और फसल भी चली गई।
किसान अपनी आंखों के सामने तबाही का मंजर देख रहे हैं। धीरे-धीरे उनकी जर-जमीन और फसलें नदी की धार में बहती जा रही हैं। कदमनगला में कटान का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण सहमे हैं। अधिकांश लोग गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। कुछ लोग नगला प्राथमिक विद्यालयों में बसेरा किए हैं। डर, चिंता और भविष्य को लेकर यहां अजीब सी बेबसी और बेचैनी का आलम है।
मकान तुड़वा रहे ग्रामीण
कदमनगला गांव कटान के मुहाने पर खड़ा है। ग्रामीण अपना मकान खुद ही तुड़वा रहे हैं। ताकि समय रहते ईंट, सरिया निकाल ली जाए। भविष्य में कहीं दूसरी जगह पर अपना ठिकाना बना सकें। अमित कुमार का घर 300 गज में बना था। बड़ी शिद्दत के साथ आशियाना तैयार किया था। लेकिन नदी के रौद्र रूप ने उसे तोड़ने पर मजबूर कर दिया। कई ग्रामीण गांव घर छोड़कर जा चुके हैं। इसी उम्मीद में कि शायद दोबारा उन्हें ये घर नहीं मिलेंगे। क्योंकि बाढ़ उन्हें अपने साथ बहाकर ले जाएगी।
राहत-बचाव में जुटा प्रशासन
बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिला-प्रशासन की राहत-बचाव टीमें सक्रिय हैं। राशन वितरण के साथ आर्थिक सहायता की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। लेखपाल अमित के मुताबिक, जिन ग्रामीणों के मकान बाढ़ में नष्ट हुए हैं-उनके मुआवजे की प्रक्रिया चल रही है।
इन क्षेत्रों में ज्यादा प्रभाव
उसहैत में कटान से कई गांवों में हाहाकार मचा है। बाढ़ से बड़े पैमाने पर फसलें तबाह हो गई हैं। इसमें सर्वाधिक कदम नगला, सिठौली खास, मुंडी, असमया रफतपुर, प्रेमीनगला, अमहदनगर, रुपैरा, जटा आदि गांव शामिल हैं। खेतीबाड़ी पर आर्थिक निभर्रता रखने वाले ग्रामीण पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।
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